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पटियाला हाउस कोर्ट स्थित स्पेशल एनआईए कोर्ट ने जहूर और नाजिर को UAPA के तहत ठहराया दोषी

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट स्थित स्पेशल एनआईए कोर्ट ने जहूर अहमद पीर और नाजिर अहमद पीर को यूएपीए की धारा 18, धारा 19 और धारा 39 के तहत दोषी करार दिया है.

आतंकवादी गतिविधियों में करते थे मदद

जहूर अहमद पीर और नाजिर अहमद पीर पर आरोप है कि हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की हत्या के बाद में कश्मीर में आंदोलन भड़काने के लिए पाकिस्तान से भारत में घुसपैठ करने वाले आतंकवादी बहादुर अली के साथ साजिश रचने और उसकी मदद करने का आरोप था. कोर्ट दोनों दोषियों की सजा पर 8 जनवरी को फैसला सुनाएगा.

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने जहूर अहमद पीर की ओर से दायर जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि यूएपीए के तहत आतंकवादियों को शरण देना गंभीर अपराध है. इस तरह के कृत्य से आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनते है और इस तरह के व्यक्ति की पहचान गोपनीय रहती है. यह नागरिकों के जीवन एवं सुरक्षा को खतरे में डालता है. आतंकवादियों को शरण देने से समाज में अशांति फैलती है.

कोर्ट ने कहा था कि आतंकवादी संगठनों से जुड़े लोगों को भोजन और आश्रय के साथ रहने के लिए सुरक्षित स्थान प्रदान करना लंबे समय तक आतंकवाद को बढ़ावा देता है. अगर किसी ने मजबूरी में शरण दिया है तो यह भले ही अपराध नहीं हो, लेकिन इस मजबूरी की वास्तविकता सुनवाई के दौरान पक्ष-विपक्ष की दलीलों को सुनने के बाद पता चलेगा.

पाकिस्तानी नागरिक से सीधा संबंध

कोर्ट ने यह भी कहा था कि यह एक ऐसा कृत्य या कृत्यों की एक श्रृंखला है, जो आतंकवादियों के लिए ‘सुरक्षित पनाहगाह‘ बनाता है. आतंकवादियों को पनाह देने वाले लोग लश्कर जैसे संगठनों को समर्थन देते है और उन्हें गोपनीय रखते हैं. उससे आतंकवादी अस्थायी रूप से समाज में शामिल हो जाता है जिससे वह मौका मिलने पर सही समय पर हमला कर सकें. 2017 में गिरफ्तार किया गया था. उसपर आरोप लगाया गया है कि पीर का पाकिस्तानी नागरिक बहादुर अली से सीधा संबंध था और उसने गांव याहामा (जम्मू-कश्मीर) में रहने के दौरान उसे भोजन और आश्रय प्रदान किया था.

बहादुर अली लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य था तथा उसकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए हथियारों एवं गोला-बारूद के साथ भारत में घुसपैठ कर आया था. उसे यूएपीए, विस्फोटक अधिनियम, शस्त्र अधिनियम, विदेशी अधिनियम और वायरलेस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराधों के लिए मामले में दोषी ठहराया गया था.

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने SIR की समय सीमा बढ़ाने की मांग पर चुनाव आयोग से मांगा जवाब, कोर्ट 6 जनवरी को करेगा सुनवाई

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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