सीजेआई बीआर गवई
प्रेसीडेंशियल रेफरेंस को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे सीजेआई बी आर गवई ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें अपने संविधान पर गर्व है. उन्होंने कहा कि देखिए नेपाल में क्या हो रहा है. नेपाल हमने देखा. उन्होंने हिमालयी राज्य में 48 घंटे पहले शुरू हुए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान 21 लोग मारे जा चुके है और केपी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा. इसपर जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा हां, बांग्लादेश में भी.
सीजेआई गवई ने यह टिप्पणी राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए बिल पास करने पर समय तय किये जाने को लेकर की. मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्यपालों से दी जा रही दलीलों के दौरान आंकड़ों के जरिए ये साबित करने की कोशिश कि, पिछले साल 70 सालों में सिर्फ 20 बिल को राज्यपालों की ओर से मंजूरी नहीं दी गई. 90 फीसदी बिल सिर्फ एक महीने में मंजूर किए गए. वही कपिल सिब्बल ने कहा कि 2014 के बाद ऐसे मामले बढ़ गए हैं और उससे पहले ऐसा होता ही नही था.
इसपर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मैं तो आपकी सरकार की भी तारीफ कर रहा हूं. 1970 के बाद से अब तक डेटा मैन पेश किया है. सुनवाई के दौरान जस्टिस बिक्रम नाथ ने कहा कि राष्ट्र पिछले 75 सालों से लोकतंत्र और संविधान के जरिए आगे बढ़ा रहा है. भले ही इस दौरान कितने बिल को मंजूरी मिली हो या नामंजूर किया गया हो. इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने कोर्ट को बताया था कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत, राष्ट्रपति और राज्यपाल नाममात्र के प्रमुख है. उन्होंने यह भी कहा था कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों जगह मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करने के लिए बाध्य है.
कर्नाटक सरकार ने यह भी कहा था कि संविधान का अनुच्छेद 361 राष्ट्रपति और राज्यपाल को किसी भी आपराधिक कार्रवाई से छूट प्रदान करता है, क्योंकि वो कोई कार्यकारी काम नही करते है. कर्नाटक सरकार ने यह भी कहा था कि परम संप्रभुता जनता के पास है, संसदीय लोकतंत्र सामूहिकता की अभिव्यक्ति है, जो विधायिका के मध्यम से अभियक्ति होती है. कार्यपालिका विधायिका से निकलती है और उसके प्रति उत्तरदायी होती है.
कर्नाटक सरकार ने यह भी कहा था कि इस सिद्धांत का अनुच्छेद 200 की संवैधानिक व्याख्या पर सीधा प्रभाव पड़ता है, जो राज्य विधेयकों को स्वीकृति देने की राज्यपाल की शक्ति से संबंधित है.
ये भी पढ़े: पुलिस थानों से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही देने से संबंधित मामले में होगी अगली सुनवाई
Also Follow Bharat Express on X
-भारत एक्सप्रेस
14 साल की उम्र में रुख्माबाई ने उस शादी को मानने से इनकार कर दिया,…
Adani Realty Stalled Projects: अटके हुए घरों की मुश्किल में अडानी रियल्टी एक बड़े समाधानकर्ता…
चंडीगढ़ में आयोजित WISE 4.0 (Women’s International Summit) कार्यक्रम में महिला अधिकारों पर जोर दिया…
दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कथित डीपफेक तस्वीर सोशल मीडिया पर…
सुप्रीम कोर्ट ने वकील पुनीत बत्रा के दफ्तर में जीएसटी विभाग की तलाशी और एडवोकेट-क्लाइंट…
महिला पहलवानों ने बृज भूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी किए जाने…