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Chief Justice BR Gavai

Sunanda Bhandare Memorial Lecture: सीजेआई बीआर गवई ने 30वें सुनंदा भंडारे स्मृति व्याख्यान में कहा कि लैंगिक समानता के बिना न्याय अधूरा है. महिलाओं को सशक्त बनाएं, समाज से भेदभाव मिटाएं.

भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने SIFOCC के सत्र में शिरकत की. उन्‍होंने कहा- “कानून भरोसे का वास्तुकार बने. विकास और न्याय में संतुलन जरूरी है, रूल ऑफ लॉ पारदर्शिता की नींव होता है.”

CJI जस्टिस बीआर गवई ने आज राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) की कॉन्‍फ्रेंस में संबोधन दिया. उन्‍होंने कानूनी सहायता को गांधी जी की कुंजी बताते हुए गरीबों तक न्याय पहुंचाने पर जोर दिया. मणिपुर की बुजुर्ग महिला से जुड़ी भावुक यादें भी साझा कीं.

CJI B.R. Gavai Speech: SIFOCC के 6ठे पूर्ण सत्र में संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर देश के मुख्य न्यायाधीश गवई ने संबोधन दिया. उन्‍होंने कहा कि व्यावसायिक कानून, सेबी, मध्यस्थता, आईबीसी जैसे कानूनों ने देश में पारदर्शिता बढ़ाई.

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई (CJI BR Gavai) ने हनोई में 38वें LAWASIA सम्मेलन में मुख्य भाषण दिया और वकीलों और न्यायाधीशों से कानूनी सिस्टम में विविधता और समावेश को बढ़ावा देने के लिए और मज़बूत प्रयास करने का आह्वान किया.

ITAT के कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई सम्‍मानित किए गए. जस्टिस गवई ने कहा कि टैक्‍स से जुड़े विवादों के लिए पारदर्शी नियुक्ति, प्रशिक्षण और तकनीक जरूरी है. अब पेंडेंसी 85,000 से 24,000 हुई.

संविधान पीठ की सुनवाई के दौरान सीजेआई बी आर गवई ने अपने संविधान पर गर्व जताते हुए नेपाल और बांग्लादेश की राजनीतिक अस्थिरता का उदाहरण दिया. राज्यपालों द्वारा बिल पास करने के मामले में समय सीमा पर चर्चा हुई.

मुंबई के चर्चगेट स्थित नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स (NCPA) में मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और उनकी पत्नी सम्‍मानित किए गए. अखिल भारतीय औद्योगिक कार्यकर्ता (AAIW) के 161 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में वहां भव्य समारोह हुआ.

CJI जस्टिस बी.आर. गवई ने ऑक्सफोर्ड यूनियन में भारतीय संविधान को सामाजिक क्रांति का प्रतीक बताया. उन्‍होंने कहा- भारत में संविधान निर्माता डॉ. आंबेडकर की दूरदर्शिता और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से वंचितों को न्याय और प्रतिनिधित्व मिला.

भारत के मुख्य न्यायाधीश ने लंदन के Gray's Inn में भारतीय संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. आंबेडकर की विरासत को सम्मान दिया. भारतीय संविधान के 75 वर्ष और डॉ. आंबेडकर के योगदान पर प्रकाश डाला, सामाजिक-आर्थिक न्याय पर भी जोर दिया.