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राशिद इंजीनियर को जमानत मिलने के बाद NIA एक आवाजाही क्षेत्र तक सीमित रखे- दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान एनआईए से पूछा कि यदि उन्हें जमानत दी जाती है, तो क्या उनकी आवाजाही को एक भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित किया जा सकता है? कोर्ट ने कहा कि वह इस समय जमानत के गुण दोष पर कोई राय व्यक्त नही करेगा. जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मधु जैन की पीठ राशिद इंजीनियर की अपील पर 11 मार्च को अगली सुनवाई करेगा.

राशिद के वकील ने कहा कि साढ़े छह साल से जेल में बंद है. उन्होंने अंतरिम जमानत का कभी दुरुपयोग नही किया है. इस दौरान उन्हें दो बार जमानत मिली है, लेकिन कभी भी उन्होंने जमानत का उल्लंघन नही किया. वकील ने यह भी कहा कि एनआईए द्वारा यह आशंका व्यक्त करना कि जमानत के दौरान गवाहों को प्रभावित करेंगे, यह निराधार है. उन्होंने यह भी कहा कि अदालत से राशिद इंजीनियर को संसद सत्र में भाग लेने की अनुमति मिल चुकी है. बचाव पक्ष ने कहा कि ट्रायल लंबा चलने की उम्मीद है. इसमें 378 गवाह थे, जो घटकर 248 हो गए है. इस लंबे समय से हिरासत में रहने के आधार पर जमानत मिलनी चाहिए.

जेल से सांसद बनने तक का सफर

राशिद इंजीनियर ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामूला सीट पर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को हराया था. राशिद इंजीनियर शेख अब्दुल रशीद के नाम से भी जाना जाता है. वह 2017 के आतंकवादी वित्तपोषण (आतंकी फंडिंग) मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से रशीद 2019 से जेल में बंद है.

बता दें कि कश्मीरी कारोबारी जहूर वटाली से पूछताछ के दौरान पूर्व विधायक शेख अब्दुल राशिद का नाम सामने आया था. एनआईए ने कश्मीर घाटी में आतंकवादी समूहों और अलगाववादियों को फंड देने के आरोप में वटाली को गिरफ्तार किया था.

आतंकवादी संगठनों और सहयोगियों पर कार्रवाई

पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च 2022 को हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक, शब्बीर शाह और मसरत आलम, राशिद इंजीनियर, जहूर अहमद वताली, बिट्टा कराटे, आफताब बट्ट उर्फ पीर सैफुल्ला के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था. एनआईए में मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सहयोग से लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, जेकेएलएफ, जैश-ए- मोहम्मद जैसे संगठनों ने जम्मू कश्मीर में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले और हिंसा को अंजाम दिया. 1993 में अलगाववादी गतिविधियों अंजाम देने के लिए ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस की स्थापना की गई.

यह भी पढ़ें: दिल्ली के द्वारका हिट एंड रन मामले में नाबालिग आरोपी के पिता की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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