Terror Funding Case: जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में फंसे बारामूला के सांसद राशिद इंजीनियर की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पटियाला हाउस कोर्ट से झटका लगने के बाद अब उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है. राशिद ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी.
राशिद इंजीनियर ने अपने बीमार पिता से मिलने और उनकी देखभाल के लिए अंतरिम जमानत की गुहार लगाई है. कोर्ट में सुनवाई के दौरान उनके वकील ने दलील दी कि राशिद के पिता अस्पताल में भर्ती हैं और वेंटिलेटर पर हैं. वकील ने इसे मानवीय आधार बताते हुए तत्काल जमानत देने की मांग की. साथ ही, बचाव पक्ष ने उनकी गिरफ्तारी को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि चुनाव और विशेष परिस्थितियों में आमतौर पर अंतरिम जमानत दी जाती है.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने राशिद इंजीनियर की अंतरिम जमानत का पुरजोर विरोध किया है. सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए एजेंसी ने कहा कि उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए. हालांकि, NIA ने विकल्प देते हुए कहा कि जमानत के बजाए ‘कस्टडी पैरोल’ दी जा सकती है, जिससे वह अपने परिवार और बीमार पिता से मुलाकात कर सकें.
यह पहली बार नहीं है जब राशिद ने जेल से बाहर आने के लिए कानूनी गुहार लगाई है. इससे पहले भी अदालत ने उन्हें कई महत्वपूर्ण अवसरों पर राहत प्रदान की थी. उदाहरण के तौर पर, कोर्ट ने उन्हें 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक चलने वाले संसद के पूरे सत्र में भाग लेने की अनुमति दी थी, और इससे पूर्व नवंबर 2025 के सत्र के दौरान भी उन्हें शामिल होने की इजाजत मिली थी. केवल विधायी कार्यवाही ही नहीं, बल्कि सितंबर 2025 में हुए उप-राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी उन्हें अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए विशेष अनुमति दी गई थी.
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राशिद इंजीनियर को 2017 के आतंकी फंडिंग मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था. वह साल 2019 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं. साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जेल में रहते हुए ही बारामूला सीट से चुनाव लड़ा और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को दो लाख से अधिक वोटों से हराकर बड़ी जीत दर्ज की थी.
पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च 2022 को राशिद इंजीनियर समेत हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक और शब्बीर शाह जैसे अलगाववादी नेताओं के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था. NIA के अनुसार, ये आरोपी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के सहयोग से लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के जरिए कश्मीर में हिंसा फैलाने और सुरक्षा बलों पर हमलों की साजिश में शामिल रहे हैं.
दिल्ली हाई कोर्ट अब इस मामले पर 27 अप्रैल को सुनवाई करेगा, जहां तय होगा कि सांसद राशिद इंजीनियर को उनके पिता से मिलने के लिए राहत मिलती है या नहीं.
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-भारत एक्सप्रेस
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