आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के मुख्य सचिव को राहत देने से इनकार कर दिया है. मुख्य सचिव ने मेंशनिंग कर पेशी से छूट की गुहार लगाई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि बिहार के मुख्य सचिव को तीन नवंबर को कोर्ट में पेश होना ही पड़ेगा.
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव की ओर से पेश वकील ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के कारण कोर्ट में पेश होना संभव नहीं है. इसपर कोर्ट ने कहा कि चुनाव कराने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है. इससे पहले कोर्ट ने सभी राज्यो के मुख्य सचिव को 3 नवंबर को कोर्ट में मौजूद रहने का आदेश दिया है. कोर्ट ने पूछा था कि कोर्ट के आदेश के बाद अभी तक क्यों नहीं जवाब दाखिल किया गया. कोर्ट ने केंद्र शासित प्रदेशों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी फटकार लगाई है.
वहीं तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और एमसीडी दिल्ली ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है. लेकिन वह रिकॉर्ड पर नही है. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा कि लगातार ऐसी घटनाएं हो रही है और विदेशों में देश की छवि खराब हो रही है. हम भी खबरें पढ़ रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी राज्यों की ओर से पेश वकीलों से कहा था कि आप लोग खबरें नही देखते. सोशल मीडिया तो देखते होंगे. मजाक बना रखा है, लोग परेशान है.
पिछली सुनवाई के कोर्ट ने संशोधन कर दिया था. कोर्ट ने कहा था पकड़े गए कुत्तों को छोड़ा जाए. कोर्ट ने कहा था कि यह अभी अंतरिम आदेश है, इसलिए संक्षेप में चर्चा की गई है. कोर्ट ने बताया था कि हमने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बना दिया है. कोर्ट ने कहा था कि हिंसक आवारा कुत्तों को नही छोड़ा जाएगा. कोर्ट ने कहा था कि नसबंदी के बाद कुत्तों को छोड़ा जाएगा.
कोर्ट ने कहा था कि कोई डॉग लवर या एनजीओ कोर्ट के आदेश में बाधा पहुचाने की कोशिश करते हैं तो उनपर जुर्माना लगाया जाएगा. कोर्ट ने कहा था कि कोई डॉग को गोद लेना चाहता है तो वह पहले आवेदन देगा. कोर्ट ने एमसीडी सहित अन्य जगह चिन्हित करेगी. 11 अगस्त को एक मामले में लिए गए स्वतः संज्ञान पर सुनवाई के बाद जस्टिस पारदीवाला की बेंच ने यह आदेश दिया था. लेकिन इसके खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी. जिस पर 14 अगस्त को कोर्ट ने सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रखा था.
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि संसद नियम और कानून बनाती है, लेकिन उनका पालन नहीं होता. उन्होंने कहा था कि एक तरफ इंसान पीड़ित है और दूसरी तरफ पशु प्रेमी यहां खड़े हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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