नेशनल हेराल्ड से संबंधित money laundering मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सोनिया, राहुल गांधी सहित अन्य को राऊज एवेन्यु कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने ईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने से फिलहाल इनकार कर दिया है. स्पेशल जज विशाल गोगने की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है. हालांकि कोर्ट ने अपने फैसले के स्पष्ट कर दिया है कि ईडी इस मामले में आगे जांच जारी रख सकती है.
कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर संज्ञान नहीं लिया जा सकता है, क्योंकि ईडी का यह मामला सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर निजी शिकायत और मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन आदेशों पर आधारित है, न कि किसी एफआईआर पर. वहीं, कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर की कॉपी को सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित अन्य को देने से इनकार कर दिया है.
कोर्ट ने आगे कहा कि एफआईआर की कॉपी पाने का ये हकदार नहीं है. कोर्ट 16 जनवरी 2026 को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. ईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे सहित अन्य को मनी लॉन्ड्रिंग के तहत आरोपी बनाया है.
यह मामला 2012 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत से शुरू हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया कि कांग्रेस ने नेशनल हेराल्ड अखबार की मूल प्रकाशन कंपनी एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड की संपत्तियों को अनुचित तरीके से हथियाने की साजिश रची.
ईडी ने अप्रैल 2025 में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, इंडियन ओवरसीज कांग्रेस प्रमुख सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन लिमिटेड और डॉकटेक्स मर्चेडाइज प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाया गया.
कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से 4 जुलाई 2014 को ईडी के पास दर्ज की गई शिकायत की कॉपी और 30 जून 2021 को ईडी द्वारा दर्ज ईसीआर की कॉपी दाखिल करने का निर्देश दिया था. इससे पहले कोर्ट ने जांच अधिकारी से पूछा था कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी का इस केस से क्या लेना देना है.
मामले की सुनवाई के दौरान ईडी का कहना था कि जिन लोगों ने कांग्रेस को दान दिया उनके साथ धोखाधड़ी की गई है. ईडी ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा था कि कि यंग इंडियन संस्था मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्त है. ईडी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा था कि जो भी यंग इंडियन को डोनेशन देता था, उसे चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया जाता था.
ईडी की ओर से यह भी कहा गया था चैरिटी के नाम पर कुछ नही हुआ, चैरिटेबल कार्य कभी शुरू ही नही हुआ. एएसजी एसवी राजू ने कहा था कि सिर्फ नाम के लिए यह संस्था चलाई गई. ईडी ने कहा था बिना कोई निवेश किए करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा कर लिया गया.
ईडी ने यह भी कहा था कि बिना एक रुपया लगाए 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति पर कब्जा कर लिया गया. उन्होंने यह भी कहा कि एजेएल के अधिग्रहण के लिए 50 लाख रुपए डोटेक्स नामक कंपनी से मिले थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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