लीगल

राम मंदिर चंदा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने चंपत राय के खिलाफ याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार की

सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर चंदा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से जुड़े मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जता दी है. अदालत ने इस नई याचिका को मुख्य/मूल याचिका के साथ संलग्न (Tag) कर दिया है.

यह याचिका ‘हिंदू महासभा’ नामक संगठन की ओर से दायर की गई है. इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कर रही है.

याचिका में क्या लगाए गए हैं गंभीर आरोप और मांगें?

याचिका में आरोप लगाया गया है कि चंपत राय भी फंड के कथित दुरुपयोग और मंदिर के आसपास की जमीनों की गैर-कानूनी खरीद-फरोख्त में शामिल रहे हैं. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों को यह निर्देश देने की मांग की है कि ट्रस्टी या उनके सहयोगियों के कब्जे में मौजूद सभी चल और अचल संपत्तियों को जब्त किया जाए.

याचिका में मौजूदा ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ को पूरी तरह से भंग कर इसके पुनर्गठन की मांग की गई है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि चंदा घोटाले के आरोप सामने आने के बाद ट्रस्ट में केवल नेतृत्व और प्रशासनिक स्तर पर ही कुछ आंशिक बदलाव किए गए थे, जो कि न्यायसंगत और पर्याप्त नहीं हैं.

पूर्व की सुनवाई और जांच से जुड़े मुख्य बिंदु

एसआईटी (SIT) का गठन: इससे पहले इस मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा चुका है. एसआईटी की कमान लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस. को सौंपी गई है, जबकि इसके अन्य सदस्यों में पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) सोमेन वर्मा और अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) गौरव ग्रोवर शामिल हैं. कोर्ट ने एसआईटी में एक फॉरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करने का निर्देश दिया था.

पारदर्शिता और ऑडिट की मांग

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने दलील दी थी कि देश के आम नागरिकों ने 500 या 1000 रुपये जैसे छोटे दान दिए हैं, लेकिन आखिरकार वह पैसा पूरी तरह ट्रस्ट तक नहीं पहुंचा है. उन्होंने मांग की कि ट्रस्ट को मिलने वाले हर एक चंदे को आधिकारिक वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए ताकि दानकर्ताओं को पारदर्शी जानकारी मिल सके.

ये भी पढ़ें: 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट: सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा पाए दोषी अहमद बावा की फांसी पर लगाई रोक

निर्मोही अखाड़े, वकील अजय कुमार राय, दिनेश कुमार यादव, हिंदू धर्म परिषद और आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह द्वारा भी इस मामले में याचिकाएं दायर की गई हैं, जिसमें वित्तीय लेन-देन के फॉरेंसिक ऑडिट और ट्रस्ट को सार्वजनिक ट्रस्ट घोषित करने की मांग की गई है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि एसआईटी को अपनी जांच पूरी करने और रिपोर्ट देने दी जाए. सीजेआई ने यह भी भरोसा दिलाया था कि मामले में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और गुणवत्तापूर्ण जांच की जा रही है.

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

अयोध्या तक पैदल क्यों निकल पड़े दिग्विजय? यात्रा के बहाने सियासी संदेश या सनातन का संवाद?

Digvijaya Singh Yatra: उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक दिग्विजय सिंह ने 900 किलोमीटर…

18 minutes ago

शेयर बाजार में खुशियां 40 मिनट ही टिकीं! फिर ऐसा पलटा खेल कि निवेशकों के डूब गए 8.78 लाख करोड़ रुपये

Stock Market Crash: शुरुआती जोरदार तेजी के बाद शेयर बाजार में बड़ा यू-टर्न देखने को…

28 minutes ago

सीएमआरएल रिश्वत मामला: पूर्व सीएम पिनाराई विजयन और परिवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, FIR पर 7 दिन की रोक

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, उनकी बेटी टी वीणा और दामाद…

29 minutes ago

गाजीपुर में भारतीय राष्ट्रीय लोकतांत्रिक जनता पार्टी ने शैलेन्द्र कुमार राय को सौंपी जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी

भारतीय राष्ट्रीय लोकतांत्रिक जनता पार्टी ने गाजीपुर जिले में संगठन को मजबूत करने के लिए…

49 minutes ago