सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2008 के चर्चित अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में मौत की सजा (Death Penalty) पाने वाले दोषी अहमद बावा अब्बू अबुबकर बरेलवी की फांसी की सजा पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही, अदालत ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब तलब किया है.
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली बरेलवी की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया, जिसमें हाईकोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि (Conviction) और मौत की सजा को बरकरार रखा था.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की दलीलें
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि उनके मु मुक्किल को पूरी तरह से एक गहरी साजिश के तहत इस मामले में दोषी ठहराया गया है. वकील ने यह भी जानकारी दी कि निचली अदालत का मूल फैसला गुजराती भाषा में है, जिसका अंग्रेजी या अन्य भाषाओं में अनुवाद कराया जा रहा है.
हाईकोर्ट का निर्णय
जुलाई 2026 में गुजरात हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगाते हुए दोषियों की अपील को खारिज कर दिया था. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में 56 मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये और 200 से अधिक घायलों को 1-1 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया था.
ये भी पढ़ें: दिल्ली लाल किला ब्लास्ट मामला: NIA कोर्ट ने सभी 11 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 21 नवंबर तक बढ़ाई
निचली अदालत का फैसला
इस मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, घटना के 14 साल बाद यानी 2022 में निचली अदालत ने 38 दोषियों को फांसी और 11 दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई थी. इसके बाद सभी दोषियों ने इस फैसले को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. दूसरी ओर, राज्य सरकार ने भी हाईकोर्ट में याचिका दायर कर यह मांग की थी कि जिन्हें आजीवन कारावास दिया गया है, उन्हें भी फांसी की सजा दी जानी चाहिए.
क्या है 2008 का अहमदाबाद ब्लास्ट?
यह आतंकी घटना 26 जुलाई 2008 की है, जब अहमदाबाद शहर महज 70 मिनट के भीतर एक के बाद एक हुए 22 सिलसिलेवार बम धमाकों से दहल उठा था. इन भीषण धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. जांच के दौरान आतंकवाद रोधी दस्ते (ATS) ने देश के अलग-अलग हिस्सों से 50 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें उज्जैन (मध्य प्रदेश) के भी पांच आरोपी शामिल थे.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.





