लीगल

अवमानना पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: केस में पक्षकार न होने पर भी आदेश न मानने वाले होंगे दोषी

सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना को लेकर बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि अदालत के आदेश की अवहेलना के मामले में सिर्फ वह जिम्मेदार नहीं है, जो मुख्य मामले की सुनवाई के दौरान पक्षकार थे, बल्कि वे व्यक्ति या अधिकारी भी अवमानना के दायरे में आ सकते हैं, जो आदेश का पालन नहीं करते है. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने यह टिप्पणी की है.

कोर्ट ने अदालत के आदेश का पालन करने के लिए अंतिम मौका दिया है. कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि अगर आदेश का पालन नहीं हुआ तो फिर अदालत अवमानना का आरोप तय करेगा. कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब छत्तीसगढ़ से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रही थी.

प्राधिकरणों को दिए निर्देश

दरअसल 20 मई 2025 के उस फैसले के अनुपालन से जुड़ा था, जिसमें राज्य प्राधिकरणों को कुछ विशेष कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे. कोर्ट ने कहा कि अवमानना की शक्ति केवल उन लोगों तक सीमित नहीं है, जिनका नाम मूल आदेश में था. कोर्ट ने कहा कि यदि कोई तीसरा पक्ष अदालत के आदेश का जानबूझकर अवहेलना करें या अदालत के कार्यों में बाधा पहुचाए उसे भी अदालत के अवमानना का दोषी ठहराया जा सकता है.

किस मामले पर हो रही थी सुनवाई?

अदालत ने सीता राम बनाम वी. बलबीर फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि तीसरे पक्ष की जिम्मेदारी उसकी औपचारिक पक्षकार स्थिति से नहीं, बल्कि उसके आचरण से तय होती है. कोई गैर-पक्षकार तकनीकी रूप से आदेश का उल्लंघन नहीं करता, बल्कि वह तब दोषी होता है, जब उसका व्यवहार न्यायिक कार्य में बाधा उत्पन्न करता है. कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि यह अब विवाद का विषय नहीं रहा कि यदि कोई व्यक्ति इस अदालत के आदेश की जानकारी के बाद भी जानबूझकर चूक करता है, तो वह अवमानना की पूर्ण शक्ति का सामना करने के लिए उत्तरदायी होगा.

ये भी पढ़ें: AI के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: अदालतों के फैसलों में इस्तेमाल ‘गंभीर दुराचार’

छत्तीसगढ़ सरकार को दिया था आदेश

बता दें कि 20 मई 2025 के फैसले के तहत छत्तीसगढ़ सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ को “गोदाम” के लिए एक अतिरिक्त पद को करने सही तीन महीने में कुछ कदम उठाना था. लेकिन तय सीमा के अंदर आदेश का पालन नहीं किया गया. कोर्ट ने पाया कि संबंधित विभाग के अधिकारियों ने समय रहते, राज्य सरकार से सलाह मशविरा नहीं लिया गया. और समीक्षा याचिका दायर की गई. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव को जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद अदालत का आदेश सुनिश्चित नहीं किया गया.

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

सीएम देवेंद्र फडणवीस पर गदगद हुए पीएम मोदी, पोस्ट कर बताया कारण?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दीपावली पर कुछ ऐसा कर दिखाया कि उसने पीएम…

20 minutes ago

पीएम मोदी के बस्तर दौरे पर घिर गए अखिलेश यादव और राहुल गांधी; जानें कैसे?

पीएम मोदी द्वारा बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दीपावली मनाने के फैसले…

44 minutes ago

CM फडणवीस ने किसान के घर मनाई दिवाली, PM मोदी की करी तारीफ; बच्ची नारायणी को दुलारा

Fadnavis Diwali Farmer: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर के लोहारी सावंगा गांव में…

45 minutes ago

नक्सली तो खत्म, अब दिमागी नक्सलियों से खतरा; बस्तर में पीएम मोदी का ऐतिहासिक ऐलान

पीएम मोदी ने दीपावली के अवसर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों…

57 minutes ago