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AI के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: अदालतों के फैसलों में इस्तेमाल ‘गंभीर दुराचार’

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के दुरुपयोग पर कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि AI से बने फर्जी फैसलों पर निर्भर रहना गंभीर दुराचार है. पढ़ें पूरी खबर

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग पर नाराजगी व्यक्त की है. कोर्ट ने कहा कि यदि किसी अदालत का फैसला एआई से तैयार किए गए फर्जी या अस्तित्वहीन निर्णयों पर आधारित पाया जाता है, तो यह महज निर्णय में त्रुटि नहीं, बल्कि गंभीर दुराचार माना जाएगा. जिसके कानूनी परिणाम होंगे.

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने यह टिप्पणी की है. साथ ही कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 10 मार्च को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.

निचली अदालत के कार्यवाही पर रोक

कोर्ट ने निचली अदालत के कार्यवाही पर रोक लगा दिया है. कोर्ट ने इस मामले में कोर्ट की सहायता के लिए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है. कोर्ट ने 27 फरवरी 2026 के अपने आदेश में कहा कि निचली अदालत द्वारा कथित रूप से एआई जनरेटर, गैर-मौजूद या सिंथेटिक फैसलों पर भरोसा करना न्यायिक प्रक्रिया पर सीधा प्रहार है. कोर्ट ने कहा कि हम इस मुद्दे की अधिक विस्तार से पड़ताल करेंगे.

आंध्र प्रदेश का है मामला

दरअसल आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने जनवरी के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह मुद्दा देखने को मिला है. अगस्त 2023 में आंध्र प्रदेश की एक निचली अदालत ने एक विवादित प्रॉपर्टी से संबंधित मामले में एआई से बनी तस्वीर के आधार पर फैसला दिया था. जिसके खिलाफ आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में दायर की गई. जिसे जनवरी 2024 में खारिज कर दिया गया था. इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. जिस पर कोर्ट सुनवाई कर रहा है.

एआई के दुरुपयोग पर याचिका

हालांकि एआई के दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका पहले से ही लंबित है. यह याचिका अधिवक्ता कार्तिकेय रावल ने दायर की है. उन्होंने कहा कि एआई और जेन एआई के बीच अंतर है. जेन एआई नए डेटा के आधार पर फेक तस्वीर बनाने में माहिर है. इसका भेदभाव और रूढ़िवादी प्रथाओं सहित कई चीजों को बढ़ावा मिल सकता हैं. दायर याचिका में अनुरोध किया गया है कि न्यायपालिका जेनएआई के इस्तेमाल के लिए एक पॉलिसी और एक ढांचा होना चाहिए ताकि एआई के हो रहे दुरुपयोग को रोका जा सके.



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