सीबीएसई के कक्षा 9वीं कक्षा के लिए लागू की गई थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को अनिवार्य रूप से लागू करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई से कई सवाल पूछा है. कोर्ट ने पूछा कि अंग्रेजी को कैसे नॉन नेटिव भाषा कहा जा सकता है? जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सवाल किया कि भारत में अंग्रेजी को किस हद तक गैर-स्वदेशी भाषा माना जा सकता है.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि नीति को लागू करने में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन याचिककर्ताओ की चिंता इसे लागू करने के तरीके को लेकर है. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई से 6 वी क्लास के छात्रों को राहत देने के लिए विकल्प तलाशने को कहा है.
मामले की सुनवाई के दौरान सीबीएसई की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि वो इस मुद्दे पर ड्रॉइंग बोर्ड वापस जाए और नए सिरे से विचार कर वापस अदालत के समक्ष आए. वही सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी मातृभाषा या स्थानीय भाषा को लेकर हीनभावना नही रखनी चाहिए. बेंच ने कहा कि एक पहलू जिस पर विचार करने की जरूरत है, वह यह है कि उपलब्ध भाषा विकल्पों के.संबंध में पर्याप्त मानव संसाधन बुनियादी ढांचा कैसे तैयार किया जाए.
अदालत ने यह भी कहा कि अगर आपने क्लास 6 को शुरुआती बिंदु के तौर पर चुना है, तो आप इस साल क्लास 6 के छात्रों को कुछ राहत देने पर विचार कर सकते है. आप इसे अगले साल लागू कर सकते है. पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि अचानक इन भाषाओं को सीखकर 10वीं की परीक्षा कैसे दे सकते हैं? इससे अव्यवस्था फैल जाएगी. यह याचिका छात्रों, पैरेंट्स और टीचर्स की ओर से दायर की गई है. सीबीएससी ने कक्षा 9 और 10 के छात्रो के लिए सीबीआई ने यह बड़ा बदलाव करते हुए सर्कुलर जारी किया है.
जारी अधिसूचना के मुताबिक अब छात्रों को तीन भाषाओं की पढ़ाई करनी होगी, जिनमें दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होगी. सीबीएसई की ओर से जारी यह अधिसूचना 1 जुलाई से लागू होगा. सीबीएसई की नई सर्कुलर ने छात्रों, अभिभावकों और कई स्कूलों के बीच हलचल पैदा कर दिया है. स्कूल असमंजस में है कि इसे कैसे लागू किया जाए.
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई विद्यार्थी विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है तो उसे तीसरी भाषा के रूप में तभी चुना जा सकता है, जब बाकी दो भाषाएं भारतीय हों. अन्यथा विदेशी भाषा को अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में पढ़ना होगा. यह व्यवस्था 2026-2027 से लागू होगी. हिंदी, तमिल, मराठी,बंगाली, गुजराती, कन्नड़, पंजाबी, संस्कृत सहित कई भाषाओं को शामिल किया गया है.
ये भी पढ़ें- ‘हमारा अपमान बंद करें!’ अखिलेश के ‘चवन्नी’ तंज पर भड़के जयंत चौधरी; 2027 में ‘सबक’ सिखाने का किया दावा
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
Hanuman Ansh Navratri Collection: नवरात्रि के खास मौके पर 'हनुमान अंश' की कमाई में आया…
रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स का मेगा आईपीओ आज निवेशकों के लिए खुल गया है. बाजार खुलते…
बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह उर्फ श्री बाबू स्वतंत्रता संग्राम, किसान आंदोलन और सामाजिक…
Ravan Dahan viral video: दशहरे पर रावण दहन के दौरान पुतले में आग लगते ही…
डॉक्टर के घर पर पार्सल डिलीवर करने आए एक डिलीवरी बॉय ने अपनी बहादुरी और…
IND vs NZ: भारत-न्यूजीलैंड टी20 सीरीज से पहले वैभव सूर्यवंशी की प्लेइंग XI में जगह…