लीगल

दागी नेताओं पर आजीवन चुनाव बैन की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जल्द होगी सुनवाई

संसद और विधानसभाओं में बढ़ते अपराधीकरण पर लगाम कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है. शीर्ष अदालत ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के तेजी से निपटारे और दोषी साबित होने वाले जनप्रतिनिधियों पर आजीवन चुनाव लड़ने का प्रतिबंध (लाइफटाइम बैन) लगाने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई का भरोसा दिया है.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने वरिष्ठ वकील और एमिकस क्यूरी (अदालत के मित्र) विजय हंसरिया की अपील पर यह सहमति जताई है.

776 में से 326 सांसदों पर आपराधिक मामले

सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी विजय हंसरिया ने चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि देश के लगभग 40 फीसदी जनप्रतिनिधियों पर आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं. संसद के 776 सदस्यों (लोकसभा और राज्यसभा) में से 326 सांसद दागी हैं. इनमें से 210 मामले तो अति गंभीर अपराधों से जुड़े हैं, जिनमें 5 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है. रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों के खिलाफ कुल 4,192 आपराधिक केस पेंडिंग हैं.

14 मुख्यमंत्रियों पर मुकदमे

अदालत में सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक देश के 14 मुख्यमंत्रियों ने अपने ऊपर दर्ज आपराधिक केस घोषित किए हैं. इसमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी 89 मामलों के साथ सबसे आगे हैं. इसके अलावा पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी पर 29, कर्नाटक के डिप्टी सीएम डी. के. शिवकुमार और आंध्र प्रदेश के सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू पर 19-19 मामले दर्ज हैं. रिपोर्ट में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन पर 5, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस और हिमाचल के सीएम सुखविंदर सिंह पर 4-4, तथा पंजाब के सीएम भगवंत मान, राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा और ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी के खिलाफ 1-1 मामला दर्ज होने की बात कही गई है.

स्पेशल कोर्ट में चले रोज सुनवाई

एमिकस क्यूरी ने चिंता जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट्स की लगातार निगरानी के बावजूद 2018 से लेकर अब तक लंबित मुकदमों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है. उन्होंने सुझाव दिया कि इन मामलों के लिए अलग से स्पेशल कोर्ट बनाई जाएं और आरोप तय होने के एक साल के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया जाए.

यह भी पढ़ें: ‘रेप वर्षों तक नहीं, एक दिन भी काफी…’: सुप्रीम कोर्ट में तरुण तेजपाल की अर्जी पर तुषार मेहता का कड़ा जवाब

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

बीजेपी की नई टीम का चरणबद्ध बदलाव, पुराने दिग्गजों की हुई दमदार वापसी

BJP New National Team: बीजेपी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों में हाल में किए गए फेरबदल को…

8 minutes ago

आखिर क्यों हादसों का हाईवे माना जाता है यमुना एक्सप्रसवे?

यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है. ग्रेटर नोएडा में बस आग…

27 minutes ago

क्या है बीजेपी की नई यूपी रणनीति? लखनऊ से लेकर बूथ तक ऐसे बिछ रहा है चुनावी जाल

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने लखनऊ में अपनी संगठनात्मक तैयारियां…

31 minutes ago

हिंदुत्व, जाति और विकास; जानिए यूपी की सियासत में कैसे बदला बीजेपी का फॉर्मूला?

कल्याण सिंह से योगी आदित्यनाथ तक उत्तर प्रदेश की राजनीति का सफर सिर्फ दो मुख्यमंत्रियों…

40 minutes ago

सर्विस रिवॉल्वर से चली गोली या साजिश? चंडीगढ़ पुलिस हेड कांस्टेबल नितिन का खून से लथपथ मिला शव

चंडीगढ़ के सेक्टर-22 में पुलिस हेड कांस्टेबल नितिन की सिर में गोली लगने से मौत…

48 minutes ago