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‘रेप वर्षों तक नहीं, एक दिन भी काफी…’: सुप्रीम कोर्ट में तरुण तेजपाल की अर्जी पर तुषार मेहता का कड़ा जवाब

रेप केस में सजा भुगत रहे पूर्व संपादक तरुण तेजपाल के सरेंडर के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई की. जस्टिस एम. एम. सुंदरेश की पीठ ने गोवा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.

Tarun Tejpal Rape Case Supreme Court Issues Notice to Goa Govt After Surrender
Edited by Vaibhav Gupta

Tarun Tejpal Rape Case: तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को दुष्कर्म मामले में मिली सजा के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गोवा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने तेजपाल की ओर से दाखिल अपील पर यह कदम उठाया है.

सरेंडर के बाद शुरू हुई सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

दरअसल, पिछली सुनवाई में शीर्ष अदालत ने तरुण तेजपाल को झटका देते हुए सरेंडर से छूट की अर्जी खारिज कर दी थी. कोर्ट ने साफ कर दिया था कि गोवा हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई तभी संभव होगी जब वह जेल में आत्मसमर्पण करेंगे और सरेंडर सर्टिफिकेट जमा करेंगे. इस शर्त का पालन करते हुए तेजपाल के सरेंडर करने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में उनकी याचिका पर औपचारिक सुनवाई शुरू हुई है.

अदालत में वकीलों की जोरदार बहस

मामले की सुनवाई के दौरान तेजपाल की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने अदालत में मजबूत पक्ष रखा. सिब्बल ने दलील दी कि निचली अदालत ने तेजपाल को बरी कर दिया था, लेकिन हाई कोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए सजा सुना दी. चूंकि यह फैसला पलटने का मामला है, इसलिए उन्हें अपील का पूरा अधिकार है.

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि घटना 2013 की है और करीब छह महीने को छोड़कर तेजपाल पूरे समय जमानत पर ही रहे हैं. उनके खिलाफ जमानत के दुरुपयोग की कोई शिकायत नहीं है. वहीं, वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने हाई कोर्ट द्वारा दी गई सजा की अवधि पर सवाल उठाते हुए इसे बेहद सख्त और ज्यादा बताया.

सॉलीसिटर जनरल का कड़ा रुख

दूसरी तरफ, गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि दुष्कर्म जैसे संगीन अपराध वर्षों तक होने की जरूरत नहीं है, इसके लिए एक दिन का कृत्य ही काफी है.

मामले के सभी पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने फिलहाल गोवा सरकार को नोटिस जारी कर आगे की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता साफ कर दिया है.

यह भी पढ़ें: रिटायर्ड जजों की सुविधाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- केंद्र से बनाई जाए राष्ट्रीय नीति

-भारत एक्सप्रेस



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