दिल्ली जंतर मंतर प्रदर्शन से संबंधित दायर याचिकाओ पर सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि धरना प्रदर्शन करने का हर नागरिक का अधिकार है. कोर्ट ने राहुल गांधी, खड़गे, अखिलेश यादव सहित अन्य को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
कोर्ट 23 नवंबर को अगली सुनवाई करेगा.वही कोर्ट ने नुकसान का दावा करने वाले व्यापारी संघों को विरोध प्रदर्शन के आयोजकों को भी पार्टी बनाने का निर्देश दिया है. साथ ही कोर्ट ने व्यापारियों की ओर से दायर याचिका पर केंद्र सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. कोर्ट ने दायर याचिकाओं को 9 कैटेगरी में विभाजित किया है, जिसपर अलग-अलग तारीख पर सुनवाई होगी. वही कोर्ट ने गर्भवती महिला पत्रकार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के लिए 23 नवंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया है.
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आप किसी जगह पर हमेशा के लिए कब्जा नहीं कर सकते. किसान, पत्रकार आदि कहां जाएंगे. हर किसी को विरोध करने का अधिकार है. एक तय समय के लिए जगह दी जानी चाहिए. सीजेआई ने वकीलों के लगातार बोलने पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आप लोगों ने कोर्ट को मछली बाजार बना रखा है. क्या आपको नहीं पता नहीं कोर्ट में किस तरह का व्यवहार किया जाना है और क्या डेकोरम है.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि जंतर-मंतर एक तय की गई जगह है. उन्होंने कहा कि जंतर मंतर पर हिंसा दिल्ली पुलिस की तरफ से की गई थी. वही हरिहरन ने कहा कि कल दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर पर हड़ताल पर बैठ गई थी. उनके साथ धारा 144 लागू नही थी.
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मेरा माइक सुरक्षित है, इसे की छीन नही सकता. इसपर मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि मिस्टर मेहता आप एक संवैधानिक पद पर हैं, उसी के हिसाब से व्यवहार करें. एसजी मेहता ने कहा कि विरोध प्रदर्शन का आह्वान करना और लाखों को मार्च करने के लिए कहना, ये क्या है.
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आप किसी जगह पर हमेशा के लिए कब्जा नहीं कर सकते. किसान, पत्रकार आदि कहां जाएंगे? हर किसी को विरोध करने का अधिकार है. एक तय समय के लिए जगह दी जानी चाहिए. एसजी मेहता ने कहा कि जंतर-मंतर एक सार्वजनिक सड़क है, कोई विरोध के लिए तय की गई जगह नहीं है.
सीजेआई ने कहा कि अनुमति देने वाले आदेश में यह साफ होने चाहिए कि अनुमति क्यों दी जा रही है या क्यों नही. आप दूसरों को यह कहकर नहीं रोक सकते कि ‘मैं अभी विरोध कर रहा हूं, इसलिए आप नही कर सकते’. एसजी ने कहा कि अनुमति सिर्फ एक दिन के लिए थी, लेकिन उन्होंने 17 दिनों तक जगह पर कब्जा रखा. वे संसद तक मार्च कर गए. बिना अनुमति के उन्हें संसद या सुप्रीम कोर्ट तक जाने की इजाजत नही दी जा सकती.
ट्रेडर एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि अगले 2 महीनों तक कोई विरोध प्रदर्शन या धरना नहीं होना चाहिए. हमारे लोग घायल हो रहें हैं. गुरुस्वामी ने कहा कि सात हजार लोगों को हिरासत में लिया गया है. क्या एक लोकतंत्र के तौर पर हम भी घायल नहीं हो रहे हैं? एसजी मेहता ने कहा कि यह हिरासत में लेना नही है, यह वहां से हटाना है.
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