सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर ओडिशा की अदालतों की एक गंभीर गलती पर नाराजगी जताई. कुछ अदालतों ने निचली जाति और आदिवासी समुदाय के आरोपियों को जमानत देते समय पुलिस स्टेशन साफ करने जैसी शर्तें लगा दी थीं.
रायगड़ा जिले में वेदांता कंपनी के बाक्साइट खदान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे दलित और आदिवासी लोगों पर यह शर्त लगाई गई थी. कम से कम आठ ऐसे मामले सामने आए, जिनमें छह दलित और दो आदिवासी थे. एक मामले में आरोपी को सुबह 6 से 9 बजे तक रोज पुलिस स्टेशन साफ करना था.
4 मई 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जोयमल्या बागची की पीठ ने कहा कि आरोपी निर्दोष माना जाता है जब तक साबित न हो जाए. ऐसी शर्तें क्रूर, अपमानजनक और कानून के खिलाफ हैं. इनसे लगता है कि ओडिशा न्यायपालिका में जातिगत पूर्वाग्रह है. कोर्ट ने इन्हें पूरी तरह शून्य और अमान्य घोषित कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा की अदालतों को निर्देश दिया कि वे तुरंत ऐसी शर्तें हटा दें. भविष्य में भी ऐसी कोई शर्त न लगाई जाए. सभी हाईकोर्ट को इस आदेश की कॉपी भेजने और इसका पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है.
Chandra Shekhar Young Turk: बलिया के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को ‘यंग तुर्क’ कहा गया, लेकिन…
फिल्म निर्देशक सनोज मिश्र को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले…
UP Agriculture में डिजिटल खेती, कृषि रिसर्च, प्राकृतिक खेती, सोलर पंप और बेहतर बाजार व्यवस्था…
Ramnagar Ramlila: वाराणसी के रामनगर की रामलीला 220 साल से ज्यादा पुरानी जीवंत परंपरा है,…
Vashu Bhagnani Hospitalized: वाशु भगनानी की लंदन में तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती…
हिमाचल प्रदेश के बद्दी में बीआईएस ने एमएसएमई इंडस्ट्री मीट का आयोजन किया. कार्यक्रम में…