Categories: लीगल

संभल हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द की, यूपी सरकार पर 10 लाख का जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा के मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई हिरासत को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है. इसके साथ ही, अदालत ने अपनी शक्तियों के दुरुपयोग को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए बेहद अहम कानूनी टिप्पणियां की हैं.

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और निर्देश

कस्टडी में कबूलनामे पर सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि निवारक हिरासत (Preventive Detention) के लिए केवल ‘एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल कन्फेशन’ यानी पुलिस कस्टडी या अदालत के बाहर किए गए कथित कबूलनामे को ही एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता. हिरासत में लेने वाले अधिकारी को अन्य सभी संबंधित परिस्थितियों और साक्ष्यों पर भी निष्पक्ष रूप से विचार करना चाहिए.

शक्तियों का गलत इस्तेमाल: अदालत ने पाया कि मुल्ला अफरोज के मामले में अधिकारियों ने इस कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है.

सुनवाई के दौरान बेंच ने यह भी सवाल उठाया था कि क्या पुलिस हिरासत में दिए गए बयानों के आधार पर एनएसए जैसी सख्त कार्रवाई के तहत एहतियाती हिरासत का आदेश जारी करने के लिए जरूरी ‘व्यक्तिगत संतुष्टि’ का आधार तैयार किया जा सकता है?

क्या है पूरा मामला और पृष्ठभूमि?

मुल्ला अफरोज को 17 जनवरी 2025 को थाना नखासा, संभल की पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद, 13 अगस्त 2025 को संभल के जिला मजिस्ट्रेट ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) की धारा 3(2) के तहत नजरबंद करने का आदेश दिया. राज्य सरकार ने 28 नवंबर 2025 को इस आदेश की 12 महीने के लिए पुष्टि (Confirm) कर दी थी. पुलिस का आरोप था कि मुल्ला अफरोज वर्ष 2024 की संभल हिंसा का मास्टरमाइंड है.

ये भी पढ़ें: संभल हिंसा में पुलिस से कहां हुई चूक? जिससे भड़का सुप्रीम कोर्ट; यूपी सरकार पर ठोका 10 लाख का जुर्माना

उत्तर प्रदेश के संभल में इस विवाद की शुरुआत 19 नवंबर 2024 को हुई थी, जब हिंदू पक्ष के समर्थकों ने अदालत में दावा किया था कि शहर में स्थित शाही जामा मस्जिद का सर्वेक्षण किया जाना चाहिए. अदालत के निर्देश पर जब 24 नवंबर 2024 को सर्वेक्षण की प्रक्रिया चल रही थी, उसी दौरान वहां भारी अशांति फैल गई थी. इस हिंसक झड़प में चार लोगों की मौत हो गई थी और 29 लोग घायल हो गए थे.

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

3 शादियां, 9 बच्चे और चौथे अफेयर का शक! हरदोई में महिला ने पति का आधा सिर मुंडवाकर पहनाई जूतों की माला

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां…

11 minutes ago

‘भगवान राम अमीरों के, शिव गरीबों के!’ सीएम रेवंत रेड्डी के बयान पर भड़की बीजेपी, कहा- हिंदुओं को बांट रही कांग्रेस

Revanth Reddy news: तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी की 'राम अमीरों के, शिव गरीबों के' टिप्पणी…

27 minutes ago

आम आदमी क्यों भुगतें?’: कैंसर दवाओं की मुनाफाखोरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की दवाओं की भारी कीमतों और कॉर्पोरेट अस्पतालों की मुनाफाखोरी पर…

31 minutes ago

लॉरेंस बिश्नोई का ‘मामा’ दीपक खत्री फंसा: लॉ की डिग्री फर्जी निकली, दिल्ली पुलिस दर्ज करेगी FIR

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के कथित मामा और वकील दीपक खत्री की लॉ डिग्री फर्जी पाई…

35 minutes ago

जाजमऊ आगजनी और गैंगस्टर एक्ट मामला; सुप्रीम कोर्ट में इरफान सोलंकी की याचिका पर सुनवाई पूरी

सुप्रीम कोर्ट ने कानपुर की सीसामऊ सीट से सपा के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी की…

40 minutes ago