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‘क्या सम्मान के लिए भी सलाह चाहिए?’, वंदे मातरम पर याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बोला

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रगीत वंदेमातरम को लेकर केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह याचिका प्रीमैच्योर है. कोर्ट ने कहा कि वंदे मातरम गाने के लिए अगर दबाव बनाया जाता है या नही गाने पर कोई कदम उठाया जाता है कि कोर्ट का रुख किया जा सकता है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह आदेश दिया है.

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मैं इस मामले में पेश नही हो रहा हूं, लेकिन मैं जानना चाहता हूं कि क्या हमें राष्ट्रगीत का सम्मान करने के लिए परामर्श की जरूरत है क्या? यह अवधारणा अमेरिकी संविधान से शुरू हुई है. वही याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने दलील देते हुए कहा कि हम इस देश मे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं. यदि लोगों को धर्म का परवाह किए बिना, राष्ट्रगान गाने के लिए बाध्य किया जाता है तो यह ठीक नही है. हेगड़े ने कोर्ट को यह भी बताया कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में अंतर है. इसमें राष्ट्रगान की बात नही कही गई है.

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि क्या 28 जनवरी की अधिसूचना में दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है? क्या राष्ट्रगीत न गाने वाले व्यक्ति को सभा से बाहर निकाल दिया जाता है? इसपर हेगड़े ने कहा कि व्यवधान उत्पन्न करने पर दंड का प्रावधान है.

राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान में अंतर को अदालत ने वकील से पूछा

हालांकि कोई कानूनी दंड नही है. फिर भी राष्ट्रगीत गाने या खड़े होने से इनकार करने वाले व्यक्ति पर हमेशा भारी बोझ रहता है. सलाह के बहाने लोगों को साथ गाने के लिए विवश किया जा सकता है. सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को दिखाने को कहा, जिसमें राष्ट्रगीत बजाने के लिए बाध्य करता है. कोर्ट ने कहा क्या राष्ट्रगीत का सम्मान करने के लिए हमें सलाह की आवश्यकता है? केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक वंदे मातरम को कई आधिकारिक कार्यक्रमों में गाया जाना अनिवार्य कर दिया गया है.

साथ ही अब राष्ट्रगीत के भी गायन या वादन के दौरान श्रोताओं को राष्ट्रगान की तरह ही सावधान की मुद्रा में खड़े होना होगा. इसके अलावा अब से किसी भी कार्यक्रम में यह 6 छंद वाला पूरा राष्ट्रगीत बजाया जाएगा.

ये भी पढ़ें: गुरुग्राम में चार साल की बच्ची से हुए यौन उत्पीड़न मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को फटकारा, कहा- ‘क्या 4 साल की बच्ची के साथ ऐसा बर्ताव करते हैं?’, जांच के लिए महिला SIT गठित

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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