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सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में पेड़ काटने पर रोक लगाई, राज्य सरकार को जारी किया नोटिस

18 जनवरी, 2026 को पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक छत्तीसगढ़ में पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने शुक्रवार को जनहितैषी और एडवोकेट अब्दुल नफीस खान द्वारा दायर एक स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता असलम अहमद जमाल (AOR) के नेतृत्व वाली कानूनी टीम, जिसमें मशहूर वकील और कानूनी एक्टिविस्ट रईस अहमद, सैयद मोहम्मद सोहेल अफजल और अन्य लोग शामिल थे, ने बहस की.

बिना सर्वे और निरीक्षण कैसे मिली कटाई की अनुमति?

यह याचिका छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के नवंबर 2025 के एक फैसले को चुनौती देते हुये दायर की गई है, जो एक जनहित याचिका (WPPIL No. 100/2025) से संबंधित है. मूल मामला सरकारी तौर पर वर्गीकृत “वन भूमि” (जिसे अक्सर राजस्व रिकॉर्ड में बड़े झाड़ का जंगल कहा जाता है) पर 400 से अधिक पेड़ों को हटाने के विवादास्पद मुद्दे पर केंद्रित है, जिसमें फल देने वाले और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं.
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उचित साइट निरीक्षण, पेड़ों की गिनती या पारिस्थितिक सर्वेक्षण किए बिना मनमाने ढंग से पेड़ हटाने की अनुमति दी गई, जो वन संरक्षण अधिनियम और अनुच्छेद 48A (पर्यावरण की सुरक्षा) के तहत संवैधानिक दायित्वों दोनों का उल्लंघन है.

16 जनवरी, 2026 को कार्यवाही के दौरान, सर्वोच्च न्यायालय ने अपरिवर्तनीय पर्यावरणीय क्षति की संभावना को देखते हुए निम्नलिखित निर्देश जारी किए:

  • कोर्ट ने स्पष्ट रूप से अधिकारियों और संबंधित प्रतिवादियों को अगली सुनवाई की तारीख तक संबंधित क्षेत्र में और पेड़ काटने से रोक दिया.
  • बेंच ने छत्तीसगढ़ राज्य और अन्य प्रतिवादियों को एक औपचारिक नोटिस जारी किया, जिसका जवाब चार सप्ताह के भीतर देना है.

इस रोक आदेश को स्थानीय पर्यावरणविदों के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, जो इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे थे. हाल की रिपोर्टों में छत्तीसगढ़ में पर्याप्त पर्यावरणीय मंजूरी के बिना राजस्व वन भूमि पर अतिक्रमण करने वाली औद्योगिक परियोजनाओं और निर्माण गतिविधियों पर चिंता जताई गई है.

पेड़ों की कटाई पर रोक लगाकर, सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन करने का संकेत दिया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि राज्य के ‘हरियाली’ से समझौता न हो.

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-भारत एक्सप्रेस

Bharat Express Desk

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