लीगल

आधार नियमों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 144 करोड़ कार्ड के बीच बदलाव की मांग पर सरकार को भेजा मामला

Fake Documents India: सुनवाई के दौरान बताया गया कि देश में लगभग 144 करोड़ आधार कार्ड जारी हो चुके हैं. याचिका में आरोप लगाया गया कि मौजूदा व्यवस्था में ढील के कारण फर्जी दस्तावेजों के आधार पर गैर-नागरिक भी आधार बनवा सकते हैं. कोर्ट ने माना कि दस्तावेजों के दुरुपयोग की समस्या केवल आधार तक सीमित नहीं है और ऐसे मुद्दों पर नीति स्तर पर सरकार को निर्णय लेना चाहिए.

कुल 144 करोड़ आधार कार्ड जारी

सुप्रीम कोर्ट ने भारत मे आधार बनवाने की प्रक्रिया में बदलाव की मांग वाली याचिका का निपटारा कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सरकार के पास जज्ञापन देने को कहा है. यह जनहित याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई थी. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है.

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि देश मे करीब 144 करोड़ आधार कार्ड जारी हो चुके हैं और लगभग सभी वयस्क नागरिकों के पास आधार है.

घुसपैठियों के लिए रास्ता खोल रही

उनका कहना था कि मौजूदा व्यवस्था में आधार बनवाना बहुत आसान है और इसमें पर्याप्त जांच-पड़ताल नहीं होती, जिससे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर गैर- नागरिक भी आधार बनवा सकते हैं. उन्होंने हालही में मुंबई में बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज मिलने का हवाला देते हुए कहा कि यह व्यवस्था घुसपैठियों के लिए रास्ता खोल रही है.

इसपर सीजेआई ने कहा कि दस्तावेजों के दुरुपयोग की समस्या केवल आधार तक सीमित नहीं है, बल्कि पासपोर्ट, डिग्री जैसे अन्य दस्तावेजों में भी ऐसा होता है और अपराधी ऐसे तरीके अपनाते रहेंगे. कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के मुद्दों को संसद और केंद्र सरकार के सामने उठाया जाना चाहिए.

घुसपैठिये आसानी से आधार कार्ड बनवा रहे

याचिका में कहा गया था कि नया आधार सिर्फ 6 साल तक के बच्चों को ही बनना चाहिए. साथ ही कहा गया था कि वयस्कों और किशोरों के लिए आधार बनवाने के नियम बहुत कड़े होने चाहिए. दायर याचिका में कहा गया था कि मौजूदा व्यवस्था का फायदा उठाकर घुसपैठिये आसानी से आधार कार्ड बनवा रहे है.

दायर याचिका में कहा गया था कि आधार केंद्रों पर बड़े बोर्ड लगाए जाएं. बोर्ड पर इस बात का खास जिक्र हो कि आधार कार्ड सिर्फ पहचान का सबूत है, यह दायर याचिका में कहा गया था कि फर्जी दस्तवेज़ों से आधार बनवाने वालों को कड़ी सजा होनी चाहिए.

साल 2000 में यह सुझाव दिया

याचिकाकर्ता का मानना था कि घुसपैठिये आधार के जरिए राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे अन्य दस्तावेज भी हासिल कर लेते हैं, जिसे रोकना बहुत जरूरी है. बता दें कि कारगिल युद्ध के बाद एक कमेटी गठित की गई थी. कमिटी ने साल 2000 में यह सुझाव दिया था कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले भारतीय नागरिकों को तत्काल आईडी कार्ड जारी किए जाए और बाद में इस प्रक्रिया को पूरे देश में शुरू किया जाए.

जिसके बाद जनवरी 2009 को योजना आयोग ने यूआईडीएआई को अधिसूचित किया.

यह भी पढ़ें: दिल्ली में जीरो विजिबिलिटी का कहर, लखनऊ एयरपोर्ट बना संकटमोचक; एक रात में 15 विमानों की इमरजेंसी लैंडिंग

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

आसमान में तैनात होगा भारत का स्वदेशी ‘जासूस’, DRDO ने HAPS एयरशिप का किया कामयाब ट्रायल

DRDO ने 21 किमी की ऊंचाई पर 'हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम' (HAPS) का सफल परीक्षण…

29 minutes ago

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई पीएम केविन रुड बोले- वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति मजबूत, पीएम मोदी के हुए मुरीद

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम केविन रुड ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के मन में पीएम…

1 hour ago

योगी सरकार का सोलर कमाल: 2,942 मेगावाट पहुंची रूफटॉप क्षमता, ‘PM सूर्य घर योजना’ में उत्तर प्रदेश नंबर-1

उत्तर प्रदेश में 'प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना' से 2,942 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर लग…

1 hour ago

SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA ब्लॉक का हल्लाबोल, पुलिस ने राहुल गांधी को हिरासत में लिया

चुनाव आयोग के काम करने के तरीके और वोटर लिस्ट के स्पेशल गहन रिवीजन यानी…

2 hours ago

‘पाकिस्तानी हों या बांग्लादेशी, बख्शे नहीं जाएंगे’ अमित शाह की नीति का असर, घाटी से 150 अवैध विदेशी बाहर

गृह मंत्री अमित शाह की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत जम्मू-कश्मीर से 150 अवैध बांग्लादेशी…

2 hours ago