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दिल्ली SIR विवाद: सुप्रीम कोर्ट इस तारीख को करेगा सुनवाई, 33 लाख नोटिस और 47 लाख नाम काटने के आरोपों पर EC से तीखे सवाल

नई दिल्ली: दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उपजे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट आगामी 19 नवंबर को सुनवाई करेगा. प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने इस मामले का उल्लेख (मेंशन) करते हुए शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया. सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और अमृता जौहरी की ओर से दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पुराने मतदाताओं से नए मतदाताओं के लिए निर्धारित ‘फॉर्म 6’ भरवाया जा रहा है तथा पर्याप्त सार्वजनिक जानकारी दिए बिना लाखों वोटरों के नाम हटाने की प्रक्रिया चल रही है.

33 लाख नोटिस और 47 लाख नाम काटने का आरोप

याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने शीर्ष अदालत को बताया कि दिल्ली में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से पहले ही करीब 47 लाख नाम हटाए जा चुके हैं और इसके अतिरिक्त 33 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘तार्किक विसंगति’ (Logical Discrepancy) के नाम पर नोटिस थमाए गए हैं. भूषण ने आगाह किया कि इससे पहले पश्चिम बंगाल में एक करोड़ से अधिक लोगों को नोटिस भेजे गए थे, जिनकी अपीलें वर्षों से लंबित पड़ी हैं; अब वही स्थिति दिल्ली में दोहराई जा रही है. उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके परिवार के सभी सदस्यों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं.

‘तार्किक विसंगति’ पर सुप्रीम कोर्ट की आयोग को दो-टूक

मामले की पिछली सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची और सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल किए थे. पीठ ने पूछा कि आखिर ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ की किस श्रेणी के तहत इतने बड़े पैमाने पर नोटिस भेजे जा रहे हैं और इसे साबित करने के लिए आम नागरिकों से किन दस्तावेजों की मांग की जा रही है? सीजेआई ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह विसंगतियों के आधार को पूरी तरह स्पष्ट करे, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित न हो.

‘एक भी वैध वोटर का नाम नहीं कटेगा’: चुनाव आयोग

चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने याचिकाकर्ता की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि हर नोटिस में कारण स्पष्ट दर्ज है और किसी भी वैध मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा. आयोग ने अदालत को अवगत कराया कि प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए 14,000 बूथ लेवल अधिकारी (BLO) और 1,200 चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) तैनात किए गए हैं. आयोग ने भरोसा दिलाया कि यदि निर्धारित समयसीमा में सत्यापन पूरा नहीं होता है, तो तारीख आगे बढ़ाई जाएगी. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि 14 हजार बीएलओ की भारी तैनाती का उपयोग केवल नोटिस देने में नहीं, बल्कि नागरिकों की सहायता करने में होना चाहिए.

गोपाल कृष्ण

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