सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की पीठ ने 'उद्योग' की परिभाषा पर सुनाया अहम फैसला
Supreme Court: औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत ‘उद्योग’ शब्द की परिभाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संविधान पीठ ने बड़ा फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने 6:3 के बहुमत से माना कि बैंगलोर वाटर सप्लाई बनाम ए राजाप्पा मामले पर पुनर्विचार की ओर मांग करने वाला रेफरेंस सही था. सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, जस्टिस जॉयमाल्या बागची, जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह फैसला सुनाया है.
बेंगलुरु वाटर सप्लाई केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंडस्ट्री की परिभाषा को लेकर 50 साल से चली आ रही अनिश्चितता को खत्म करते हुए यह फैसला दिया है. इंडस्ट्री का व्यापक अर्थ ही सही व्याख्या है और यह उन सभी संस्थानों पर लागू होगा जहां कर्मचारी-नियोक्ता का संबंध होता है. सीजेआई सूर्यकांत ने फैसला देते हुए कहा कि सुनवाई के दौरान हमने कहा कि यह मामला अब सि सप्लार्फ सैद्धांतिक रह गया है.
हमने संक्षेप में अपनी राय दी है और हममें से चार लोगों ने सवाल तैयार किए है. क्या ट्रिपल टेस्ट सही है? क्या 2020 के कोड़ का मुख्य कानून पर कोई असर पड़ता है? क्या वेलफेयर एक्ट (कल्याणकारी कानून) को इंडस्ट्री (उद्योग) माना जा सकता है? और क्या संप्रभु कार्य को इसके दायरे में शामिल किया जा सकता है?
आजादी के बाद के दशकों में इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट 1947 में बताए गए इंडस्ट्री के व्यापक अर्थ की जरूरत थी. ताकि कर्मचारियों की नौकरियों को मनमाने ढंग से नौकरी से निकाले जाने से बचाया जा सके. कोर्ट ने कहा कि यह नियम सरकार के कुछ खास संप्रभु कार्यो को छोड़कर बाकी सभी संस्थानों पर लागू होगा. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने दान पर चलने वाले मंदिरों और चैरिटेबल संस्थाओं को उद्योग की व्यापक परिभाषा के दायरे से बाहर रखने से इनकार किया है उन्होंने कहा कि अगर किसी संस्थान में कर्मचारी और नियोक्ता के बीच संबंध है, तो उस पर यह नियम लागू होगा, भले ही उसका मकसद आध्यात्मिक या चैरिटेबल ही क्यों न हो.
इसमें अहम बात यह है कि कोर्ट ने कहा है कि अब रद्द हो चुके औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत चल रही सभी लंबित कार्यवाही का फैसला मूल बैंगलोर वॉटर सप्लाई ट्रिपल टेस्ट के आधार पर ही किया जाएगा. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों का निपटारा हो चुका है, उन्हें फिर से नहीं खोला जाएगा. इससे पहले सात-सदस्यीय संविधान पीठ ने बेंगलुरु जलापूर्ति एवं मलजल शोधन बोर्ड की याचिका पर विचार करते हुए 21 फरवरी 1978 को उद्योग शब्द की परिभाषा पर फैसला सुनाया था. वर्ष 1975 में जस्टिस वी. आर कृष्णा अय्यर ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ‘इंडस्ट्री’ की पहचान के लिए जो कानूनी कसौटी तय की थी, उसे दोबारा परखा जाएगा.
खासतौर पर फैसले के पैरा 140 से 144 में निर्धारित सिद्धांतों की वैधता और व्याख्या पर संविधान पीठ विचार करेगी. पीठ यह भी देखेगी की औद्योगिक विवाद (संशोधन) अधिनियम 1982 और औद्योगिक संबंध संहिता 2020 (जो 21 नवंबर 2025 से प्रभावी है) का मूल अधिनियम में इंडस्ट्री शब्द की व्याख्या पर क्या कानूनी प्रभाव पड़ता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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