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सिगरेट-शराब पर टैक्स से लेकर बार रूम तक! जानिए महिला वकीलों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट देशभर की महिला वकीलों के लिए अदालतों में बुनियाद सुविधाओं की कमी के मामले में 2 दिसंबर को सुनवाई करेगा. कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और हाई कोर्ट्स को निर्देश दिया है कि वे जिला, उपमंडल और तालुका अदालतों में, जहां भी महिला वकील वकालत करती है, उनके लिए अलग महिला वॉशरूम और बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए. चाहे महिला वकीलों की संख्या कितनी भी हो. राज्यों को जरूरत के हिसाब से फंड और जमीन उपलब्ध करानी होगी, जबकि हाई कोर्ट्स की इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटियों को इसे लागू करने को प्राथमिकता देनी होगी.

अटॉर्नी जनरल बने नोडल ऑथोरिटी; महिला वकीलों की याचिका पर सुनवाई

कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर वेंक्टरमनणी को नोडल ऑथोरिटी बनाया है, जो प्रगति रिपोर्टों को इकठ्ठा करेंगे और निर्देशों के पालन में समन्वय करेंगे. कोर्ट सारिका त्यागी, सीमा वशिष्ठ समेत 6 महिला वकीलों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है. याचिककर्ताओ ने हर कोर्ट में ‘लेडीज बार रूम’ और जूनियर वकीलों के लिए ‘यंग लॉयर्स प्रोफेशनल असिस्टेंट फंड बनाने की मांग की गई है. पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने देश भर की अदालत में महिलाओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं पर चिंता जताई. कोर्ट ने कहा था कि कानूनी पेशे में महिलाओं की भागीदारी तो बढ़ी है, लेकिन कई अदालत परिसरों में उनके बैठने के लिए उचित बार रूम, साफ वाशरूम, चेंजिंग रूम और बच्चों की देखभाल के लिए नर्सिंग रूम जैसी बुनियादी सुविधाएं नदारद है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि महिलाओं का इस पेशे में आना संतोष की बात है. यह सभी का कर्तव्य है कि उनके लिए अनुकूल और गरिमापूर्ण माहौल तैयार किया जाए.

युवा वकीलों की आर्थिक सुरक्षा: प्रतिभा को बचाने के लिए संस्थागत सहायता की अपील

इससे पहले कोर्ट ने कहा था कि अगर इसके लिए शराब या सिगरेट पर अतिरिक्त टैक्स लगाना है तो लगाइए हमे इसे मंजूरी देंगे. महिला वकीलों द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि देश के अनेक हाई कोर्ट, जिला अदालतों, तहसील अदालतों, ट्रिब्यूनलों और आयोगों में महिला वकीलों के लिए बार रूम और बाकी बुनियादी सुविधाएं मौजूद नहीं है. पिछली सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि अदालत परिसरों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना केवल प्रशासनिक आवश्यकता नही है, बल्कि गरिमा और समान अवसर से जुड़ा संवैधानिक दायित्व है.

अदालत ने युवा वकीलों की आर्थिक चुनौतियों पर भी चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि प्रतिभाशाली युवा वकीलों को पेशा छोड़ने से रोकने के लिए संस्थागत सहायता व्यवहार पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए.

यह भी पढ़ें: हैदराबाद और सिकंदराबाद समेत 7 ठिकानों पर ईडी की रेड, करोड़ों के हेरफेर का खुलासा

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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