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सेना के कर्नल से मारपीट के मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, सेना का सम्मान करें, उनकी वजह से आप चैन की नींद सोते है

सेना के कर्नल से मारपीट के मामले में पंजाब के चार पुलिस अधिकारियों को राहत देने से इनकार कर दिया है. सेना के कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ और उनके बेटे के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा मारपीट की गई. सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है. हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिया था. जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सेना का सम्मान करें, उनकी वजह से आप चैन की नींद सोते है. कोर्ट ने कहा कि युद्ध के समय आप इन्ही सैन्य अधिकारियों का महिमामंडन करते हैं, लेकिन शांति के समय उनका अपमान करते हैं.

हाई कोर्ट ने दी सीबीआई को जिम्मेदारी

मामले की सुनवाई के दौरान पुलिसकर्मियों की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि हाई कोर्ट ने ऐसा आदेश दिया है मानो ट्रायल शुरू होने से पहले ही उन्हें दोषी ठहरा दिया गया हो. कर्नल बाथ द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि इस मामले की जांच तीन अप्रैल को चंडीगढ़ पुलिस को सौंपी गई थी, लेकिन यह दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि साढ़े तीन महीने बाद भी अभी तक नही तो किसी को गिरफ्तार किया गया और ना ही सही तरीके से जांच की गई.

मारपीट, धमकी और पहचान पत्र छीनने जैसे आरोप दर्ज

बता दें कि 13 और 14 मार्च 2025 की रात को सेना के कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ और उनके बेटे के साथ ढाबे पर खाना खा रहे थे, तभी पार्किंग को लेकर विवाद हो गया. जिस दौरान 12 पुलिसकर्मियों ने कर्नल और उनके बेटे के साथ मारपीट की और दोनों को मारकर अधमरा कर दिया. उनका मोबाइल फोन और पहचान पत्र छीन लिया. उसके बाद पुलिसकर्मियों ने फर्जी एनकाउंटर की धमकी देकर चले गए. यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गया. जिसके 8 दिन बाद इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 115 (2), 351 (2), 109, 310, 117 (1) 117(2),126(2) और 190 के तहत एफआईआर दर्ज किया गया.

बाद में पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया. शिकायतकर्ता ने इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ जब एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन एफआईआर दर्ज नही किया गया. शिकायतकर्ता का आरोप है कि राज्य सरकार पुलिसकर्मियों को बचा रही है. हाई कोर्ट ने 16 जुलाई को सीबीआई जांच का आदेश दिया है. इससे पहले 3 अपैल को हाई कोर्ट ने मामले की जांच चंडीगढ़ पुलिस को सौंपी थी, और चार महीने में जांच को पूरा करने का आदेश दिया था. शिकायतकर्ता का आरोप है कि चंडीगढ़ पुलिस निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच करने में विफल रही है.

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भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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