सुप्रीम कोर्ट ने 2014 के प्रमति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट के फैसले की सत्यता पर संदेश व्यक्त किया है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने लंबे समय से अटके प्रमोशन विवाद पर यह साफ किया है कि अब पदोन्नति बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा पास किए संभव नहीं होगी. कोर्ट ने कहा कि जिन टीचर्स की नौकरी को पांच साल से ज्यादा बचा है, उन्हें टीईटी पास करना जरूरी होगा. अगर ऐसा नही किया तो उन्हें इस्तीफा देना होगा या फिर कम्पसलरी रिटायरमेंट लेना होगा.
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह आदेश माइनॉरिटीज संस्थानों में लागू होगा या नही यह बड़ी बेंच तय करेगी. इस आदेश का असर सीधे तौर पर सरकारी प्राथमिकी और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों पर पड़ेगा. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे भारत के शिक्षा विभाग में बड़ा बदलाव लाने वाला माना जा रहा है. कोर्ट ने कहा कि हमने 28 जनवरी 2025 को दो मुद्दे तैयार किए थे.
इसके बाद हमने दोनों मुद्दों को फिर से तैयार किया है. पहला मुद्दा यह था कि क्या राज्य इस बात पर जोर दे सकता है कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान में नियुक्ति पाने के इच्छुक शिक्षक को टीईटी उतीर्ण करना होगा? यदि हां, तो क्या ऐसी योग्यता प्रदान करने से संविधान के तहत गारंटीकृत अल्पसंख्यक संस्थानों के किसी भी अधिकार पर असर पड़ेगा.
दूसरा सवाल यह था कि क्या 29 जुलाई 2011 की एनसीईटी की अधिसूचना जारी होने से काफी पहले नियुक्त शिक्षक नए सम्मिलित प्रावधान को पूरा करते हैं. यह धारा 23 (II) में दूसरा प्रावधान है और पदोन्नति के लिए पात्र माने जाने के लिए टीईटी में उतीर्ण होने के लिए वर्षो का शिक्षण अनुभव होना जरूरी है. मद्रास हाईकोर्ट ने जून 2025 में कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति 29 जुलाई 2011 से पहले हुई थी उन्हें सेवा में बने रहने के लिए टीईटी पास करने की बाध्यता नही है. लेकिन पदोन्नति के लिए टीईटी पास करना जरूरी है.
भारत एक्सप्रेस
MP SUGAM PARIVAHAN SEVA LAUNCH: मध्य प्रदेश में सरकारी निगरानी वाली सुलभ और सुरक्षित यात्री…
ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेस-वे पर दिल्ली से महोबा जा रही स्लीपर बस में आग…
एडीआर ने नेशनल इलेक्शन वॉच के साथ लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए निर्वाचित…
बिहार के लखीसराय में 60 साल के पिंकू सिंह ने 23 साल की वर्षा रानी…
सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों को मिलने वाली सुविधाओं में राज्यों के बीच…
बनारस को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, लेकिन इसी शहर की चिताओं के बीच…