तिरुपति के श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के प्रसाद में जानवरों की चर्बी के आरोपों से संबंधित मामले में दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. यह याचिका बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दायर की थी. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा यह याचिका बिना पर्याप्त आधार के दायर किया गया है. साथ ही कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा एक सदस्यीय समिति का गठन कार्यवाही में बाधा उत्पन्न नही करेगी. क्योंकि उक्त जांच का दायरा स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है.
कोर्ट ने कहा कि हमारी राय में ऐसी प्रशासनिक जांच, आरोप पत्र की आपराधिक कार्यवाही का अतिशयोक्ति पूर्ण पहलू नहीं हो सकती. कोर्ट ने कहा कि हितों का टकराव नहीं है कोई अतिशयोक्ति नही है और जांच या पड़ताल का दायरा स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है. इसलिए हम संतुष्ट हैं कि याचिका में पर्याप्त आधार नही है. कोर्ट ने कहा कि दोनों प्रकियाएं कानून के अनुसार ही जारी रहेगी. पांच सदस्यीय एसआईटीमामले की जांच कर रही है. जिसमें दो सीबीआई, दो आंध्रप्रदेश पुलिस और एकएफएसएसएआई के अधिकारी शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि तिरुपति लड्डू बनाने में पशुओं की चर्बी के इस्तेमाल के आरोपों की जांच के लिए एक स्वतंत्र एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था. जिसके बाद आंध्र प्रदेश सरकार ने एसआईटी की रिपोर्ट की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया था. जिसके खिलाफ सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.
स्वामी ने दायर याचिका में आरोप लगाया था कि राज्य सरकार द्वारा एक सदस्यीये समिति के गठन का निर्णय इस मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही में बाधा उत्पन्न करेगा. इससे पहले दायर याचिका में स्वामी ने कहा था कि आस्था से खिलवाड़ करने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की थी. उन्होंने यह भी मांग की थी कि आंध्र प्रदेश सरकार को लड्डू बनाने के लिए इस्तेमाल पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दे. साथ ही उन्होंने एक विस्तृत फॉरेंसिक रिपोर्ट की भी मांग की थी.
राज्य सरकार ने गुजरात की एक प्रयोगशाला की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया था कि लड्डुओं में इस्तेमाल किए गए घी में बीफ, फीस ऑयल और चर्बी (सुअर की चर्बी) के अंश थे. इससे पहले हिंदू सेना के मुखिया सुरजीत यादव ने याचिका में कहा था कि तिरुपति लड्डू में चर्बी और मछली के तेल के बात सामने आने से करोड़ों हिंदुओं की आस्था को झटका लगा था.
याचिका में कहा गया था कि हिंदू भावनाओं को जिन लोगों ने ठेस पहुचाई है, उन पर जांच के बाद कड़ी कार्रवाई हो. सुरजीत यादव ने अपनी याचिका में यह भी कहा था कि यह याचिका आम लोगों के हित मे दायर की गई है, जो वित्तीय और कानूनी रूप से पूरी तरह लैस न होने के कारण स्वयं न्यायालय तक नही पहुच सकते है और इस प्रकार वे जनहित याचिका का सहारा लेने की स्थिति में नही है.
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वही तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के पूर्व अध्यक्ष और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी से राज्यसभा सांसद वाईवी सुब्बा रेड्डी ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एसआईटी गठित कर इन आरोपों की जांच कराए जाने की मांग की थी.
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