तीस हजारी कोर्ट ने एक नाबालिग लड़की की बलात्कार के बाद हत्या करने के जुर्म में पिता-पुत्र को दोषी ठहराया है. साथ ही दोषी के पिता को भी दंडित किया है, जिसने बच्ची की हत्या में उसकी सहायता की थी. लड़की 9 फरवरी, 2019 को लापता हो गई थी. उसका शव दो दिन बाद एक पार्क में मिला था तथा उसके हाथ-पैर बंधे हुए थे.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबीता पुनिया ने कहा कि परिस्थितियां और अभियोजन पक्ष के साथ्य एक पूर्ण श्रृंखला पेश करता है. उससे निष्कर्ष निकलता है कि 27 वर्षीय राजेंद्र ने अपनी हवस पूरी करने के लिए लड़की का अपहरण किया और उसका यौन उत्पीड़न किया. उसका अपराध उचित संदेह से परे साबित हुआ है.
यह साबित हुआ कि वह व्यक्ति और उसका पिता क्रूर हत्या के लिए जिम्मेदार हैं. राजेंद्र को जहां बलात्कार, हत्या और अपहरण के अलावा पोक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया है, वहीं 57 वर्षीय सरन को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत दोषी ठहराया गया है.
अदालत ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि अपहरण के पीछे मकसद हवस थी. उसकी हत्या कर उसके शव को पार्क में गुप्त रूप से फेंकने के पीछे का मकसद कानूनी सजा से खुद को बचाना था. अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष अभियोजक श्रवण कुमार बिश्नोई ने कहा कि राजेंद्र ने चिप्स का लालच देकर लड़की को बहलाया-फुसलाया और अपने घर पर उसका उत्पीड़न किया.
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-भारत एक्सप्रेस
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