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लोकेशन के आधार पर टैक्स तय नहीं हो सकता, बेंगलुरु फाइव-स्टार होटल पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु के फाइव-स्टार होटलों पर लगाए जाने वाले प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़े विवाद में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए होटल मालिक की मुख्य अपील को खारिज कर दिया है और समान प्रॉपर्टी टैक्स व्यवस्था को पूरी तरह से बरकरार रखा है. हालांकि, अदालत ने पेनल्टी (जुर्माने) के मामले में होटल मालिक को कुछ राहत प्रदान की है.

लोकेशन के आधार पर टैक्स में अंतर नहीं

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक तार्किक सवाल उठाते हुए टिप्पणी की कि क्या किसी होटल की केवल लोकेशन अलग होने के आधार पर उसके प्रॉपर्टी टैक्स की दर अलग-अलग होनी चाहिए, जबकि दोनों होटल एक ही श्रेणी यानी ‘फाइव-स्टार’ कैटेगरी में आते हैं?

कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर एक फाइव-स्टार होटल किसी पॉश इलाके में है और दूसरा चांदनी चौक जैसे ऐतिहासिक क्षेत्र में है, तो सिर्फ जगह बदलने से टैक्स की दरें अलग क्यों होनी चाहिए? (कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस उदाहरण का उद्देश्य चांदनी चौक की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को कमतर आंकना नहीं था).

अदालत ने स्पष्ट किया कि फाइव-स्टार होटलों को उनकी आधुनिक सुविधाओं, सेवाओं और लग्जरी मानकों के आधार पर एक विशेष श्रेणी में रखा जाता है. सरकार के पास टैक्स निर्धारण के लिए वर्गीकरण (Classification) करने का पूरा अधिकार है, बशर्ते उसके पीछे का आधार तर्कसंगत हो और उसका उद्देश्य से उचित संबंध हो. केवल इस आधार पर किसी टैक्स व्यवस्था को असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता कि कोई अन्य वर्गीकरण भी संभव था.

पुराने फैसलों का हवाला

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1990 के अपने चर्चित फैसले ‘केरल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन बनाम स्टेट ऑफ केरल’ का भी हवाला दिया. उस फैसले में यह माना गया था कि कर (Tax) लगाने के उद्देश्य से होटलों और रेस्तरां को उनकी श्रेणी के आधार पर अलग-अलग वर्गों में विभाजित किया जा सकता है.

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पेनल्टी पर राहत के निर्देश

मुख्य अपील खारिज होने के बावजूद कोर्ट ने पेनल्टी के मुद्दे पर राहत देते हुए निर्देश दिया है कि होटल मालिक पेनल्टी के खिलाफ संबंधित आयुक्त (Commissioner) के समक्ष तीन सप्ताह के भीतर पेश होकर अपना पक्ष रख सकता है. आयुक्त को निर्देश दिया गया है कि वह होटल मालिक का पक्ष सुनने के बाद इस पर नियमानुसार नया फैसला लें. जब तक आयुक्त इस मामले में कोई निर्णय नहीं लेते, तब तक पेनल्टी की वसूली के लिए किसी भी प्रकार की जबरन दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.

गोपाल कृष्ण

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