वेदांता ग्रुप लिमिटेड ने जयप्रकाश एसोसिएट्स को लेकर अडानी समूह के रिजॉल्युशन प्लान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. वेदांता लिमिटेड ने इस मामले में NCLAT के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही इस कंपनी के लिए NCLAT ने अडानी इंटरप्राइजेज के 14,535 करोड़ के रिजॉल्युशन प्लान मंजूर कर लिया था. हालही में वेदांता के मालिक अनिल अग्रवाल ने सार्वजनिक तौर पर दावा किया है कि उनकी कंपनी वेदांता को जेपी.समूह की संपत्ति की बोली जितने की लिखित पुष्टि मिल गई थी. लेकिन बाद में यह फैसला बदल दिया गया. हालांकि, उन्होंने इसके कारणों पर विस्तार से कोई जानकारी नही दी.
अडानी ग्रुप ने जयप्रकाश एसोसिएट्स की संपत्ति के लिए 15000 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी, जबकि वेदांता ग्रुप की बोली 17000 करोड़ रुपए के करीब थी. इसके बावजूद अडानी ग्रुप के प्लान को स्वीकार किया गया, जिसका विरोध वेदांता ग्रुप की तरफ से किया जा गया था.
वेदांता के मालिक का कहना है कि हमारी बोली ज्यादा थी, ऐसे में किस आधार पर अडानी ग्रुप की बोली को.स्वीकार किया गया है. जयप्रकाश एसोसिएट्स को जून 2024 में इनसॉल्वेंसी में एडमिट किया गया था. कंपनी 57000 करोड़ रुपये से अधिक के लोन का डिफॉल्ट किया था. कर्जदाताओं का मानना था कि ग्रुप का प्रस्ताव ज्यादा बेहतर है, क्योंकि उसमें तुरंत मिलने वाली रकमज्यादा थी और बाकी पैसा भी 2-3 साल से मिल जाता, जबकि वेदांताके मामले में यह अवधि 6 साल की थी.
जयप्रकाश एसोसिएट्स का बिजनेस रियल एस्टेट, सीमेंट, हॉस्पिलिटी, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर तक फैला है.
-भारत एक्सप्रेस
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