Lasoda health benefits in Hindi: गर्मियों के मौसम में जब घरों की रसोई से सौंफ, मेथी और सरसों के तेल में पके खट्टे-चटपटे मसालों की खुशबू आने लगती है, तो अक्सर डाइनिंग टेबल पर पारंपरिक अचार की यादें ताजा हो जाती हैं. इन्हीं पारंपरिक स्वादों के बीच एक ऐसा नाम है जो सदियों से भारतीय थाली का हिस्सा रहा है ‘लसोड़ा’. इसे कहीं गुंदा, कहीं लेसुए, तो कहीं गोंदी या लभेड़े के नाम से पुकारा जाता है. आमतौर पर लोग इसे सिर्फ अचार और सब्जी तक सीमित मानते हैं, लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक पोषण विज्ञान की नजर से देखें तो यह पेड़ पर उगने वाला कोई साधारण फल नहीं, बल्कि सेहत का संपूर्ण सुरक्षा कवच है.
वैज्ञानिक रूप से कॉर्डिया डाइकोटोमा (Cordia dichotoma) और आम बोलचाल में ‘इंडियन चेरी’ के नाम से पहचाने जाने वाले इस मध्यम आकार के पर्णपाती वृक्ष की पत्तियां, छाल, फल और बीज तक औषधीय खजाने से भरपूर हैं.
ये भी पढ़ें: WiFi में नहीं चलेगा WhatsApp! 1 जनवरी से क्या बदल रही है भारत सरकार?
पारंपरिक लसोड़े का अचार: राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश में इसका अचार काफी लोकप्रिय है. फल को उबालकर उसकी चिपचिपी गुठली निकाली जाती है और सौंफ, मेथी, कलौंजी, राई, हल्दी व सरसों के तेल के साथ तैयार किया जाता है. स्वाद और खटास बढ़ाने के लिए इसमें कच्चा आम (कैरी) भी कद्दूकस करके मिलाया जाता है.
मसालेदार सूखी सब्जी: प्याज, लहसुन, अदरक और अमचूर के साथ सरसों के तेल में छौंकी गई लसोड़े की सब्जी पूड़ी और पराठों के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है.
पना और चटनी: कई इलाकों में उबले लसोड़े को पुदीने और हरी मिर्च के साथ मैश कर पाचक चटनी और रायता बनाया जाता है.
नेचुरल पेनकिलर (जोड़ों और घुटनों के दर्द में राहत): लसोड़े में बेहतरीन एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजनरोधी) गुण पाए जाते हैं. बढ़ती उम्र में होने वाले गठिया (Arthritis) और घुटनों की जकड़न से राहत पाने के लिए इसकी सब्जी का सेवन बहुत उपयोगी माना जाता है.
पेट और पाचन का सच्चा साथी: इसमें मौजूद प्राकृतिक चिपचिपापन (Mucilage) और फाइबर आंतों को प्राकृतिक चिकनाई देते हैं, जिससे पुरानी कब्ज (Constipation) और पेट की ऐंठन में आराम मिलता है.
लिवर के लिए सुरक्षा कवच: यह शरीर से टॉक्सिन्स यानी जहरीले तत्वों को बाहर निकालकर लिवर के कामकाज को दुरुस्त रखने में मदद करता है.
इम्यूनिटी और शारीरिक कमजोरी दूर करे: लसोड़े के सूखे फलों के चूर्ण को मिश्री और दूध के साथ लेने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और दुर्बलता दूर होती है.
गले, खांसी और दांत दर्द में अचूक: छाल का काढ़ा बनाकर पीने से छाती का बलगम और खांसी शांत होती है. वहीं, छाल के काढ़े में थोड़ा सेंधा नमक डालकर गरारे (Gargle) करने से मसूड़ों की सूजन और दांतों के दर्द में तुरंत राहत मिलती है.
त्वचा संक्रमण में लेप: दाद, खाज-खुजली या फोड़े-फुंसी पर इसके बीजों को पीसकर या पत्तियों का रस लगाने से इन्फेक्शन तेजी से ठीक होता है.
ये भी पढ़ें: सपा-कांग्रेस सीट शेयरिंग का खाका तैयार, समझिए 172 सीटों का ABCD फार्मूला
आज के दौर में जब लोग महंगे सप्लीमेंट्स और दवाओं की ओर भाग रहे हैं, तब लसोड़ा हमें याद दिलाता है कि हमारी पारंपरिक रसोई ही सबसे बड़ी औषधालय है. पेड़ की छाल से लेकर फल के गूदे तक, लसोड़ा प्रकृति का वह उपहार है जो स्वाद भी देता है और तंदुरुस्ती भी. अगली बार जब आपके सामने लसोड़े का अचार या सब्जी आए, तो इसे सिर्फ एक व्यंजन समझकर न खाएं, बल्कि यह मानकर चखें कि यह सदियों पुरानी सेहत की चाबी है.
Google DeepMind AI Military Controversy: पेंटागन और इजरायल के साथ सैन्य समझौतों के विरोध में…
नई दिल्ली के PHD हाउस में आयोजित स्पोर्ट्स CSR Summit में खेल राज्य मंत्री रक्षा…
दिल्ली हाईकोर्ट ने सैन्य खुफिया जानकारी लीक करने के आरोपी हबीब-उर-रहमान की जमानत याचिका खारिज…
सुप्रीम कोर्ट वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने और स्कूलों में इसे अनिवार्य…
दिल्ली हाईकोर्ट ने EWS और DG छात्रों को स्कूल यूनिफॉर्म के बदले नकद सहायता देने…
ईडी ने मेगा मिलेनियम प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मुंबई, दिल्ली और महाराष्ट्र के ठिकानों पर…