Almond Mom Trend -bharat express
Almond Mom Trend: सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘Almond Mom Trend’ चर्चा में है. यह शब्द उन पैरेंट्स के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो बच्चों के खान-पान, वजन और शरीर को लेकर जरूरत से ज्यादा सतर्क या प्रतिबंधात्मक रवैया अपनाते हैं. इस ट्रेंड ने खासतौर पर बच्चों की डाइट और बॉडी इमेज को लेकर नई बहस छेड़ दी है. ‘Almond Mom’ शब्द का इस्तेमाल इंटरनेट कल्चर में ऐसे पैरेंटिंग पैटर्न के लिए किया जाता है, जहां बच्चे को भूख लगने पर भी सीमित मात्रा में खाना खाने की सलाह दी जाती है या कैलोरी और वजन को लेकर लगातार बातें की जाती हैं. सोशल मीडिया पर इस तरह के व्यवहार को लेकर कई लोग अपने अनुभव भी साझा कर रहे हैं.
‘Almond Mom’ कोई मेडिकल टर्म नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हुआ एक अनौपचारिक शब्द है. इसका इस्तेमाल अक्सर ऐसे पैरेंट के लिए किया जाता है जो बच्चे के खाने को लेकर अत्यधिक नियंत्रण रखते हैं. ऐसे व्यवहार में कभी-कभी बच्चे को मिठाई, फास्ट फूड या दूसरे खाद्य पदार्थों से दूर रखने, खाने की मात्रा पर लगातार नजर रखने या शरीर के आकार को लेकर टिप्पणी करने जैसी बातें शामिल हो सकती हैं. हालांकि, बच्चों को संतुलित और पौष्टिक भोजन देने की कोशिश अपने आप में गलत नहीं है. चिंता तब बढ़ती है जब भोजन को लेकर लगातार रोक-टोक बच्चे के लिए तनाव या अपराधबोध का कारण बनने लगे.
बचपन और किशोरावस्था में शरीर को लेकर सोच तेजी से विकसित होती है. ऐसे में अगर बच्चे को बार-बार वजन, शरीर के आकार या कैलोरी के आधार पर आंका जाए तो उसके मन में अपने शरीर को लेकर नकारात्मक धारणा बन सकती है. सोशल मीडिया पर विशेषज्ञों और पैरेंटिंग कम्युनिटी की चर्चा में भी इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि बच्चों के साथ भोजन और शरीर को लेकर बातचीत सकारात्मक और संतुलित होनी चाहिए.
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पैरेंटिंग विशेषज्ञों के बीच आम सलाह यह है कि बच्चों के सामने भोजन को ‘अच्छा’ या ‘बुरा’ बताने के बजाय संतुलित खान-पान की आदत विकसित करने पर ध्यान दिया जाए. बच्चों को अलग-अलग तरह के पौष्टिक खाद्य पदार्थों से परिचित कराना और परिवार के साथ नियमित भोजन करना बेहतर आदतों का हिस्सा हो सकता है. इसी तरह, शारीरिक गतिविधि को केवल वजन घटाने से जोड़ने के बजाय खेल, ऊर्जा और फिटनेस के नजरिए से देखना अधिक सकारात्मक तरीका माना जाता है.
‘Almond Mom Trend’ के वायरल होने की एक वजह सोशल मीडिया पर पैरेंटिंग के पुराने तरीकों पर खुलकर चर्चा होना भी है. कई लोग अपने बचपन के अनुभवों को साझा कर रहे हैं और बता रहे हैं कि खाने या शरीर को लेकर परिवार की टिप्पणियों ने उनकी सोच को कैसे प्रभावित किया. हालांकि, हर परिवार और हर बच्चे की स्थिति अलग होती है. इसलिए किसी भी वायरल ट्रेंड को देखकर निष्कर्ष निकालने के बजाय बच्चों के लिए संतुलित भोजन, सकारात्मक बॉडी इमेज और स्वस्थ पारिवारिक माहौल पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है.
भारत एक्सप्रेस
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