World Kidney Day 2026: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, ऑफिस का स्ट्रेस और जंक फूड का चस्का… सुनने में ये बातें बहुत आम लगती हैं, लेकिन इनका सबसे घातक असर हमारे शरीर के ‘नेचुरल फिल्टर’ यानी किडनी पर पड़ रहा है. आज 12 मार्च को पूरी दुनिया ‘वर्ल्ड किडनी डे’ मना रही है. इस मौके पर जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद डराने वाले हैं. वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की एक ताजा रिसर्च बताती है कि क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) अब दुनिया में मौत का नौवां सबसे बड़ा कारण बन चुकी है.
भारत की स्थिति तो और भी चिंताजनक है. देश में करीब 13.8 करोड़ लोग किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं. चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश है जहां किडनी के मरीजों की तादाद इतनी ज्यादा है. दिल्ली के सीके बिरला हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विक्रम कालरा कहते हैं कि किडनी की बीमारी एक ‘साइलेंट किलर’ है, जो दबे पांव आती है और जब तक आपको पता चलता है, तब तक खेल बिगड़ चुका होता है.
डॉ. विक्रम बताते हैं कि किडनी की खराबी के लक्षण शुरुआत में बिल्कुल नजर नहीं आते. जब तक मरीज को थकान, शरीर में सूजन, पेशाब कम आना या हाई ब्लड प्रेशर जैसी दिक्कतें महसूस होती हैं, तब तक किडनी अपनी कार्यक्षमता का एक बड़ा हिस्सा खो चुकी होती है. अक्सर लोग इन लक्षणों को मामूली कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में डायलिसिस या ट्रांसप्लांट तक की नौबत ले आता है.
हम भारतीय अक्सर सिरदर्द या बदन दर्द होने पर डॉक्टर से पूछे बिना मेडिकल स्टोर से पेनकिलर खरीदकर खा लेते हैं. डॉ. विक्रम चेतावनी देते हैं कि इबुप्रोफेन या डाइक्लोफेनाक जैसी दवाइयों का बार-बार इस्तेमाल किडनी तक होने वाले ब्लड फ्लो को कम कर देता है. अगर आपको पहले से शुगर या बीपी की समस्या है, तो ये दवाइयां जहर की तरह काम कर सकती हैं. इसलिए बिना डॉक्टरी सलाह के कभी भी पेनकिलर न लें.
अक्सर कहा जाता है कि जितना ज्यादा पानी पिएंगे, किडनी उतनी ही साफ रहेगी. लेकिन यह एक आधा सच है. डॉक्टर के मुताबिक, जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी किडनी पर दबाव बढ़ा सकता है और शरीर के इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस को बिगाड़ सकता है. प्यास के हिसाब से संतुलित मात्रा में पानी पीना ही समझदारी है. साथ ही, अगर आपके पेशाब का रंग हल्का पीला है, तो यह सामान्य है; इसका एकदम सफेद होना ही सेहत की गारंटी नहीं है.
अगर आपको शुगर (Diabetes) है, तो आपकी किडनी पर खतरे की तलवार हमेशा लटकी रहती है. डायबिटीज के मरीजों में अक्सर बिना किसी लक्षण के किडनी खराब होने लगती है. ऐसे में साल में कम से कम एक बार यूरिन और ब्लड टेस्ट (eGFR) जरूर करवाना चाहिए.
समय रहते अपनी लाइफस्टाइल सुधारें, वजन कंट्रोल करें और नमक का सेवन कम करें.
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-भारत एक्सप्रेस
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