धर्म

पितृ पक्ष 21 सितंबर तक: किसी मृत व्यक्ति की संतान न हो तो पत्नी कर सकती है श्राद्ध, पत्नी भी न हो तो कुटुंब लोग कर सकते हैं धूप-ध्यान

अभी देशभर में पितृ पक्ष का पवित्र समय चल रहा है, जो इस बार 21 सितंबर तक चलेगा. यह वह खास अवधि होती है जब परिवार के सदस्य अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करते हैं. पितृ पक्ष का महत्व सिर्फ धार्मिक कृत्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने परिवार और पूर्वजों से जुड़ी परंपराओं को बनाए रखने का भी अवसर है.

देवी सीता ने राजा दशरथ के लिए पिंडदान क्यों किया ?

पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार, मृतक की संतान ही अपने माता-पिता और पूर्वजों के लिए श्राद्ध-धूप करती है. लेकिन यदि किसी मृतक के कोई संतान न हो तो उसकी पत्नी को यह कर्तव्य निभाना चाहिए. यह बात उज्जैन के जाने-माने ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा ने स्पष्ट की है. पं. शर्मा बताते हैं कि पौराणिक कथाओं में भी इस बात का प्रमाण मिलता है. एक प्रसिद् कथा है कि देवी सीता ने अपने ससुर राजा दशरथ के लिए फल्गु नदी के किनारे पिंडदान और तर्पण जैसे पवित्र कर्म किए थे. उस समय श्रीराम-लक्ष्मण किसी अन्य कार्य से दूर थे और सीता माता ने राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए यह पुण्य कार्य अपनी इच्छा से किया था. इस कथा से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं को भी अपने परिवार के पूर्वजों के लिए श्राद्ध-धूप करने का अधिकार और कर्तव्य है.

इसके अलावा, यदि किसी मृत व्यक्ति की पत्नी, माता-पिता या संतान नहीं हैं, तो परिवार के अन्य सदस्य, जैसे बहू या अन्य रिश्तेदार, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर सकते हैं. इससे यह परंपरा निरंतर बनी रहती है और पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त होता रहता है.

भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व

पितृ पक्ष का यह त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह परिवार में भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का माध्यम भी है. इसलिए इस समय सभी को चाहिए कि वे अपने पूर्वजों की स्मृति में श्रद्धा और भक्ति के साथ यह कार्य करें, ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले और परिवार में सुख-शांति बनी रहे.

पितृ पक्ष की यह परंपरा सदियों पुरानी है और भारत की सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा है. हर परिवार के लिए यह अवसर है कि वे अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करें और उनकी आत्मा की शांति के लिए आवश्यक कर्म करें.

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-भारत एक्सप्रेस 

Shreyansh Choubey

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