साइंस

Shubhanshu Shukla का अनुभव फ्यूचर के इंडियन स्पेस मिशन के लिए कैसे अहम होगा, साइंटिस्ट डॉ. मिला मित्रा से जानिए

Shubhanshu Shukla Axiom 4 Mission:भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से पृथ्वी पर सकुशल वापसी कर इतिहास रच दिया है. यह मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.

नासा की पूर्व वैज्ञानिक डॉ. मिला मित्रा ने इस मिशन के महत्व और इसके भविष्य के प्रभावों पर प्रकाश डाला. शुभांशु ने 18 दिन अंतरिक्ष में बिताए, जहां उन्होंने 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें से 7 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा डिज़ाइन किए गए थे.

शुभांशु के मिशन का वैज्ञानिक महत्व

डॉ. मिला मित्रा ने बताया कि एक्सिओम-4 मिशन भारत के लिए इसलिए खास है, क्योंकि यह पहली बार है जब कोई भारतीय अंतरिक्ष यात्री आईएसएस पर गया और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में प्रयोग किए. इनमें मूंग और मेथी जैसी फसलों का अंतरिक्ष में विकास, मानव शरीर पर शून्य गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव, और मानव-कंप्यूटर इंटरफेस का अध्ययन शामिल था. ये प्रयोग गगनयान मिशन और लंबी अवधि के अंतरिक्ष स्टेशन मिशनों के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेंगे.

उन्होंने कहा कि ये प्रयोग भविष्य में अंतरिक्ष में आत्मनिर्भरता और खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि अंतरिक्ष में तेजी से होने वाली प्रक्रियाएं पृथ्वी पर अनुसंधान को गति दे सकती हैं.

शारीरिक चुनौतियां और पुनर्वास

डॉ. मित्रा ने बताया कि लंबे समय तक शून्य गुरुत्वाकर्षण में रहने से मांसपेशियां कमजोर होती हैं, हृदय की धड़कन और रक्त प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे दृष्टि और प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर पड़ता है. शुभांशु और उनके सहयोगियों को पृथ्वी पर लौटने के बाद 2 हफ्ते से 1 महीने तक पुनर्वास प्रक्रिया से गुजरना होगा. इस दौरान चिकित्सीय प्रक्रियाएं उनकी मांसपेशियों, दृष्टि, और प्रतिरक्षा प्रणाली को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल बनाएंगी.

गगनयान मिशन के लिए अमूल्य

डॉ. मित्रा ने शुभांशु के अनुभव को गगनयान मिशन के लिए अमूल्य बताया, जो 2027 में लॉन्च होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि शुभांशु का अनुभव अंतरिक्ष में रहने, काम करने और वापसी की प्रक्रिया को समझने में मदद करेगा. यह मिशन भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को दर्शाता है, जो युवाओं के लिए प्रेरणा और वैज्ञानिक खोजों के लिए आधार बनेगा.

यह भी पढ़िए: Welcome शुभांशु शुक्ला! अंतरिक्ष से 18 दिन बाद हजारों कोस का सफर पूरा कर धरती पर ऐसे हुई सकुशल वापसी

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Bharat Express Desk

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