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Gaganyaan mission

पृथ्वी से स्पेसक्राफ्ट के जरिए उड़ान भरकर भारतीय मूल के एक एस्ट्रोनॉट डॉ. अनिल मेनन (Anil Menon) अंतरिक्ष में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पहुंच गए. वहां उसने NASA की अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर के साथ 6 घंटे 27 मिनट तक सफलतापूर्वक 'स्पेस वॉक' (Spacewalk) किया.

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव जुड़ गया है. इस सफलता ने भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में ला दिया जो स्वदेशी तकनीक से अपने नागरिकों को अंतरिक्ष भेजने और वापस लाने की क्षमता रखते हैं.

ISRO ने गगनयान मिशन के तहत दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. यह परीक्षण क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित वापसी और पैराशूट सिस्टम की जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण है...

Gaganyaan Mission: भारतीय मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारी में इसरो ने रविवार को इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया. चिनूक हेलीकॉप्टर से छोड़े गए डमी क्रू मॉड्यूल में पैराशूट सिस्टम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की.

भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री Shubhanshu Shukla ने रविवार को दिल्ली के सुब्रतो पार्क स्थित वायुसेना साभागार में स्कूली छात्रों से मुलाकात की.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा, "भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम प्रयोगशालाओं और प्रक्षेपण यान तक सीमित नहीं है.

National Space Day: राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वैज्ञानिकों की मेहनत से भारत जल्द ही गगनयान मिशन के साथ अंतरिक्ष में नई छलांग लगाएगा और आने वाले समय में देश अपना खुद का स्पेस स्टेशन भी स्थापित करेगा.

भारत में निजी अंतरिक्ष कंपनियां प्रक्षेपण, उपग्रह और डाउनस्ट्रीम तकनीकों में अग्रणी बन रही हैं. चंद्रयान-3 की सफलता और बढ़ते निवेश के साथ भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है और गगनयान मिशन में निजी क्षेत्र की भूमिका अहम होगी.

नासा के साथ काम कर चुकीं वैज्ञानिक डॉ. मिला मित्रा ने कहा कि शुभांशु शुक्ला का ISS वाला अनुभव भारत के गगनयान मिशन के लिए अहम होगा. 7 भारतीय प्रयोगों से भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों को मदद मिलेगी.

ISRO ने बताया, प्रकिया में एक वेल डेक शिप अपने डेक में पानी भरता है, जिससे नावों, लैंडिंग क्राफ्ट और अंतरिक्ष यान की सुरक्षित डॉकिंग और रिकवरी संभव हो पाती है. गगनयान मिशन के लिए यह तकनीक अंतरिक्ष यात्रियों की उनके अंतरिक्ष मिशन के बाद तेज और आरामदायक रिकवरी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है.