Dak Kanwar Yatra: सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव के भक्त हरिद्वार और अन्य धार्मिक स्थलों से कांवड़ में गंगाजल लेकर शिवधाम के लिए निकलते हैं. कांवड़ यात्रा चार प्रकार की होती है, जिनमें से ‘डाक कांवड़’ को सबसे चुनौतीपूर्ण और कठिन माना जाता है.
डाक कांवड़ यात्रा को कांवड़ यात्रा का सबसे कठिन रूप माना जाता है, जिसमें गंगाजल उठाने के बाद 24 घंटे के भीतर बिना रुके शिव धाम पहुंचना होता है. इसमें भक्तों की टोली एक-दूसरे की मदद से लगातार दौड़कर यात्रा पूरी करती है. यात्रा के दौरान सात्विक जीवन और कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है.
कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है. इस यात्रा के कई रूप होते हैं, जैसे- सामान्य कांवड़, खड़ी कांवड़, दांडी कांवड़ और डाक कांवड़. इनमें से ‘डाक कांवड़’ को पूरा करना हर किसी के बस की बात नहीं होती. इसका मुख्य कारण यह है कि डाक कांवड़ उठाने के बाद भक्त को शिव धाम पहुंचने तक रास्ते में कहीं भी रुकने की अनुमति नहीं होती. जल अर्पित करने तक भक्तों को बिना विश्राम किए लगातार आगे बढ़ते रहना पड़ता है.
डाक कांवड़ यात्रा को तय समय सीमा के भीतर पूरा करना अनिवार्य होता है, जो सामान्यतः 24 घंटे की होती है. इसी कारण यह यात्रा एक टीम वर्क के रूप में की जाती है. भक्तों का एक समूह वाहन में साथ चलता है, जबकि एक कांवड़िया कांवड़ लेकर तेजी से दौड़ता है. जब दौड़ने वाला कांवड़िया थक जाता है, तो दूसरा साथी तुरंत बिना कांवड़ को नीचे रखे अपने कंधे पर ले लेता है और दौड़ना जारी रखता है. यात्रा का यह सिलसिला शिव धाम पहुंचने और जलाभिषेक करने तक लगातार चलता रहता है.
शास्त्रों के अनुसार, कांवड़ यात्रा के नियम बेहद सख्त और पवित्र होते हैं. यात्रा शुरू करने से कुछ सप्ताह पूर्व ही भक्तों को पूरी तरह से सात्विक जीवन शैली अपनानी होती है और तामसिक भोजन का त्याग करना पड़ता है. यात्रा के दौरान शराब, सिगरेट या तंबाकू जैसे किसी भी प्रकार के नशे का सेवन पूरी तरह वर्जित है. इसके साथ ही मन में शुद्ध विचार बनाए रखना और किसी भी प्रकार के अधर्म या गलत काम से दूर रहना जरूरी होता है. मान्यता है कि जो भक्त इन कड़े नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करते हुए अपनी यात्रा पूरी करते हैं, भगवान शिव उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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