Sawan 2026: भगवान शिव के भक्त सालभर उनकी भक्ति में डूबे रहते हैं लेकिन जब बात शिवरात्रि की आती है तो बहुत से लोग कंफ्यूज हो जाते हैं. अक्सर लोगों को लगता है कि सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि दोनों एक ही पावन पर्व हैं, क्योंकि दोनों ही मौकों पर व्रत रखे जाते हैं शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है और हर तरफ ‘ॐ नमः शिवाय’ की गूंज सुनाई देती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों पर्वों के बीच एक बड़ा और दिलचस्प फर्क है? आइए आज इस कन्फ्यूजन को पूरी तरह दूर करते हैं.
साल में कितनी शिवरात्रियां आती हैं?
सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि शिवरात्रि साल में सिर्फ एक बार नहीं आती! हिंदू पंचांग के हिसाब से हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि होती है. इस तरह पूरे साल में कुल 12 शिवरात्रियां आती हैं. इनमें से फाल्गुन महीने में आने वाली शिवरात्रि को ‘महाशिवरात्रि’ कहा जाता है, जबकि सावन के महीने में पड़ने वाली तिथि को ‘सावन शिवरात्रि’ के रूप में मनाया जाता है.
क्यों खास है महाशिवरात्रि?
महाशिवरात्रि को देवों के देव महादेव का सबसे बड़ा और मुख्य पर्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी खास रात को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. यही वजह है कि महाशिवरात्रि को शिव और शक्ति के मिलन का उत्सव माना जाता है. इस दिन देश के हर कोने में शिव मंदिरों के अंदर पूरी रात भव्य अनुष्ठान, भजन और विशेष पूजा-अर्चना चलती है.
सावन शिवरात्रि का क्या है महत्व?
अब बात करते हैं सावन शिवरात्रि की. जैसा कि हम सब जानते हैं कि सावन का पूरा महीना ही भोलेनाथ को सबसे ज्यादा प्रिय है. इसलिए इस महीने की शिवरात्रि का अपना एक अलग ही आध्यात्मिक महत्व है. इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और विधि-विधान से शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि देश की मशहूर कांवड़ यात्रा इसी पर्व से जुड़ी होती है. लाखों शिव भक्त दूर-दूर से पवित्र नदियों का जल लेकर पैदल चलते हैं और सावन शिवरात्रि के दिन ही आकर भगवान शिव को अर्पित करते हैं.
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समुद्र मंथन से जुड़ी मान्यता
इसके अलावा, सावन शिवरात्रि का गहरा नाता समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से भी है. मान्यता है कि जब मंथन के दौरान भयंकर हलाहल विष निकला था तब संसार की रक्षा के लिए महादेव ने उसे अपने गले में रोक लिया था. उस विष के प्रभाव और जलन को शांत करने के लिए ही देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया था, तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा चली आ रही है.
तो आपको साफ शब्दों में समझा दें कि महाशिवरात्रि शिव-पार्वती के विवाह का सबसे बड़ा उत्सव है, जबकि सावन शिवरात्रि सावन मास के उल्लास और कांवड़ यात्रा की परंपरा से जुड़ी एक बेहद पवित्र मासिक शिवरात्रि है. दोनों ही दिनों में महादेव की आराधना का फल अनंत गुना माना जाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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