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मिथुन संक्रांति से लेकर मासिक शिवरात्रि तक इस हफ्ते पड़ रहे हैं ये व्रत और त्यौहार, आज पंचक के खत्म होने से शुभ कार्यों की शुरुआत

Weekly Vrat Tyohar 2023 (13 to 19 June): व्रत-त्योहार के लिहाज से जून का महीना बेहद ही खास होने जा रहा है. 12-18 जून के बीच भी कई व्रत त्योहार पड़ रहे हैं जहां 17 जून से शनि वक्री हो रहे हैं वहीं सूर्य देव मिथुन राशि में गोचर करने वाले हैं. इसके अलावा अशुभ माने जाने वाला पंचक भी समाप्त हो जाएगा.

इस हफ्ते आषाढ़ दर्श अमावस्या, योगिनी एकादशी, सूर्य संक्रांति, गुरु प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि जैसे व्रत और पर्व-त्योहार पड़ेंगे. इसलिए व्रत-त्योहारों के लिहाज से यह सप्ताह बेहद ही खास है. आइए जानते हैं इस हफ्ते पड़ने वाले व्रत-त्योहार के बारे में.

पंचक हो रहा है खत्म

13 जून 2023, मंगलवार को पांच दिनों से चला आ रहा पंचक समाप्त हो जाएगा. जिसके बाद शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाएगी. पंचक की शुरुआत 09 जून 2023, शुक्रवार को प्रात:काल 06:02 बजे से हो रही है और यह 13 जून 2023, मंगलवार को दोपहर 01:32 बजे खत्म होगा.

योगिनी एकादशी 

14 जून 2023 बुधवार, योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की विशेष मान्यता है. योगिनी एकादशी के दिन पूजा और व्रत करने से जीवन में चली आ रही परेशानियों से निजात मिलता है. वहीं धार्मिक ग्रंथों में इस बात का जिक्र है कि योगिनी एकादशी व्रत करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल मिलता है. इसके व्रत से व्यक्ति के परिवार में सुख शांति बनी रहती है.

मिथुन संक्रांति 2023 डेट और मुहूर्त

सूर्य देव के मिथुन राशि में प्रवेश करने पर मिथुन संक्रांति मनाई जाती है. इस साल यह 15 जून 2023 को पड़ रही है. बात करें इसके पुण्य काल की तो यह 15 जून की सुबह 11:37 से शुरु होकर शाम को 06:22 तक रहेगा. मिथुन संक्रांति के दिन दान-पुण्य और सूर्य देव की पूजा का खास महत्व है.

मासिक शिवरात्रि 

भगवान शिव को समर्पित मासिक शिवरात्रि 16 जून 2023 को पड़ रही है. शुक्रवार के दिन पड़ने वाली इस आषाढ़ मासिक शिवरात्रि (Ashadha Masik Shivratri) को जहां व्रत रखा जाएगा वहीं रात्रि में निशिता मुहूर्त में पूजा की जाएगी.

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आषाढ़ दर्श अमावस्या

इस हफ्ते 17 जून 2023 को शनिवार के दिन आषाढ़ दर्श अमावस्या (Ashadha Amavasya 2023) पड़ रही है. आषाढ़ दर्श अमावस्या के दिन पितरों की कृपा पाने और उनकी प्रसन्नता के लिए तर्पण और श्राद्ध करने का विधान है. माना जाता है कि इससे  पितृ प्रसन्न होते हैं और अपने परिवारी जनों को आशीर्वाद देते हैं. वहीं स्नान-दान और पूजा पाठ इसके अगले दिन 18 तारीख को किया जाएगा.

Rohit Rai

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