गुरु पूर्णिमा 2026
Guru Purnima 2026: भारत में गुरु-शिष्य परंपरा का एक समृद्ध इतिहास है, जिसमें गुरु को ईश्वर से भी ऊपर माना जाता है. कबीर जी ने कहा है, ‘गुरु गोविंद दोउ खड़े , काके लागूं पाएं. बलिहारी गुरु आपनें , गोविंद दियो बताए. अर्थात गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर है.’ अर्थात गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर है. पारंपरिक रूप से, गुरु-शिष्य का रिश्ता अर्पण और समर्पण का होता था. शिष्य का गुरु के प्रति सम्पूर्ण समर्पण होता था, जबकि गुरु का स्नेह शिष्य के प्रति निस्वार्थ होता था. इस रिश्ते की मजबूती से सामाजिक मौलिकता और नैतिकता को बल मिलता था.
29 जुलाई को पूरा देश गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) मना रहा है. इस समय अपने शिक्षक और गुरुओं को सम्मान के स्वरूप याद कर रहे हैं. कई लोग अपनी यादों को साझा कर रहे हैं. हालांकि, कम ही लोग अब उसे प्रतिष्ठा की पंरपरा का पान करते हैं जहां गुरु के प्रति समर्पण होता था. वहीं शिक्षा का बाजारीकरण होने से लोग अब शिक्षक को भी किसी सामान की तरह ट्रीट करने लगे हैं.
आज के समय में, शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव आए हैं. गुरु अब एजेंसी बन गया है, जो आपको किताबों और तकनीक की शिक्षा देता है, जबकि शिष्य ग्राहक बन गया है, जो अपने दिए मूल्य के अनुसार सब कुछ पा लेना चाहता है. आज भी पारंपरिक शिक्षा की मांग है, लेकिन गुरु-शिष्य के रिश्तों को शर्मसार करने वाली घटनाएं सामने आती रहती हैं. हमें आवश्यकता है कि हम गुरु और शिक्षक में अंतर करें और शिक्षा के मूल उद्देश्यों को जानें.
गुरु एक आध्यात्मिक विषय है, जबकि शिक्षक आधुनिक विषय है. गुरु का स्थान जीवन में सर्वोपरि है, जो हमें जीवन की दिशा देता है. शिक्षक हमें शिक्षा प्रदान करते हैं और जीवन को चलाने के लिए आय के स्रोत के अनुरूप हमें शिक्षा देते हैं. गुरु और अच्छे शिक्षक दोनों का स्थान हमारे जीवन में सर्वोच्च होता है. हमें आवश्यकता है कि हम आत्मीय सम्मान को शीर्ष पर रखें और शिक्षा के मूल उद्देश्यों को जानकर शिक्षक के साथ अपनी खोई प्रतिष्ठा को पाने का प्रयास करें.
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गुरु-शिष्य का रिश्ता अर्पण और समर्पण का होता था. वहीं शिक्षक आपको आधुनिक शिक्षा और तकनीकी से परिचित कराता है. कई मायनों में वो आपको गुरू भी हो सकता है. पहले के समय में गुरु ही शिक्षक भी होता था. हालांकि, आज के दौर में न तो शिक्षक उस तरह से व्यवहार कर रहे हैं और न ही छात्रों में वो नैतिकता बची है. मतलब साफ है कि मानव को जब भी सीखने सिखाने की आवश्यकता होगी उसे एक अच्छे शिक्षक की जरूरत होगी. इस कारण जरूरी है कि बाजारीकरण से ऊपर उठकर हम शिक्षा के मूल उद्देश्यों को जान शिक्षक के साथ अपनी खोई प्रतिष्ठा बचाएं. यह गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima 2026) का असल सेलिब्रेशन होगा.
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