Naxalism Jharkhand News: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश से नक्सलवाद और लाल आतंक के समूल विनाश की दिशा में भारत को सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सफलता मिली है. केंद्रीय गृह मंत्रालय की सीधी निगरानी और कड़े निर्देशों के बाद झारखंड के जंगलों में चलाए गए एक हाई-प्रोफाइल सीक्रेट ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने भाकपा (माओवादी) के सर्वोच्च नेता, केंद्रीय कमेटी सदस्य और ₹1 करोड़ के इनामी मोस्ट वांटेड नक्सली मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया है.
यह भी बताते चलें कि मिसिर बेसरा के साथ उसके दो अन्य खूंखार साथी मोछू और गौरव हांसदा भी दबोचे गए हैं. इस एक कार्रवाई ने झारखंड को आधिकारिक तौर पर ‘नक्सल मुक्त’ बनाने का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है.
ज्ञात रहे मिसिर बेसरा कोई साधारण नक्सली नहीं बल्कि पूर्वी भारत में माओवादी का सबसे बड़ा थिंक टैंक और रणनीतिकार माना जाता था. केंद्रीय कमेटी का सदस्य होने के नाते वह झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में माओवादी नेटवर्क को ऑपरेट करता था.
सुरक्षा बलों पर हुए कई बड़े जानलेवा हमलों, लैंडमाइन विस्फोटों और निर्दोष ग्रामीणों की हत्या की साजिश रचने का वह मुख्य आरोपी था. भारत सरकार और राज्य सरकारों ने मिलकर उसकी खोपड़ी पर 1 करोड़ रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित कर रखा था.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश से नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की जो नीति बनाई थी, यह कामयाबी उसी सटीक रणनीति का नतीजा है. शाह के नेतृत्व में गृह मंत्रालय ने सुरक्षा बलों को खुली छूट दी और अत्याधुनिक इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर माओवादियों के टॉप कमांडरों को सीधे टारगेट करने का सीक्रेट प्लान (Naxalism Jharkhand News) तैयार किया.
वहीं बताते चलें शाह के इस ‘मास्टरप्लान’ के तहत पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने एक-एक करके झारखंड और छत्तीसगढ़ के सबसे खतरनाक नक्सली गुटों की रीढ़ तोड़ दी और अब मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के साथ इस खूनी खेल का अंतिम चैप्टर भी बंद हो गया है.
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खुफिया एजेंसियों से मिले एक बेहद गुप्त और सटीक इनपुट के आधार पर सीआरपीएफ (CRPF) की एलीट कमांडो यूनिट कोबरा बटालियन-209 ने झारखंड के घने और दुर्गम जंगलों में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तर्ज पर महा-ऑपरेशन चलाया. सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को कई किलोमीटर के दायरे में चुपचाप सील कर दिया.
जैसे ही मिसिर बेसरा अपने दो बॉडीगार्ड्स मोछू और गौरव हांसदा के साथ ठिकाना बदलने लगा, कोबरा कमांडोज ने बिना एक भी गोली चलाए तीनों को सीधे सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया और दबोच लिया.
सुरक्षा विशेषज्ञों और रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी केवल एक नक्सली की गिरफ्तारी नहीं है बल्कि यह माओवादी विचारधारा का आखिरी ताबूत साबित होगी. झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने लगातार ऑपरेशन्स चलाकर शीर्ष कमांडरों को या तो न्यूट्रलाइज किया है या गिरफ्तार किया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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