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Holi 2026: इस बार होलिका दहन का मुहूर्त 2 मार्च को शाम 6 बजे से, जानिए पूजन की आसान विधि और 5 खास मान्यताएं

Holi Festival: इस साल होली का त्योहार 2 मार्च से शुरू हो रहा है. होलिका दहन 2 मार्च को शाम को सूर्यास्त के बाद होगा. मुहूर्त शाम 6 बजे से शुरू होकर रात करीब 12 बजे तक रहेगा. इस समय भद्रा का अशुभ प्रभाव नहीं होगा. इसलिए लोग बिना किसी चिंता के होली की पूजा और दहन कर सकते हैं. परंपरा के अनुसार, सूरज ढलते ही होली की पूजा की जाती है और उसके बाद लकड़ियों का ढेर जलाया जाता है. यह बुराइयों पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है.

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

2 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा की शुरुआत शाम को हो रही है. इसलिए होलिका दहन इसी दिन शाम 6 बजे से होगा. पूजा के लिए लोग घर या चौराहे पर लकड़ियां इकट्ठा करते हैं. पूजा में गाय का गोबर, गुड़, अनाज और फूल चढ़ाए जाते हैं. होलिका दहन के बाद लोग अगले दिन रंगों से होली खेलते हैं. यह त्योहार खुशी, रंग और एकता का प्रतीक है.

होली पर आसान पूजा विधि

होली पर पूजा करना आसान है. शाम को स्नान करके साफ कपड़े पहनें. होली के ढेर के सामने बैठकर गणेश-विष्णु का ध्यान करें. गुड़, चावल, फूल और दक्षिणा चढ़ाएं. “ओम होलिका देव्यै नमः” मंत्र जपें. इसके बाद होली जलाएं. जलते ढेर की परिक्रमा करें और मनोकामना मांगें. पूजा खत्म होने पर प्रसाद बांटें.

होली से जुड़ी 5 खास मान्यताएं

वसंतोत्सव: होली पहले वसंत का उत्सव थी. फाल्गुन पूर्णिमा पर ठंड खत्म होती है और वसंत आता है. 7वीं सदी में सम्राट हर्ष के नाटक में इसका जिक्र है. अब यह रंगों की होली बन गई है.

दोलयात्रा: पूर्वी भारत में राधा-कृष्ण को झूले पर बिठाकर उत्सव मनाते हैं. मूर्तियों पर अबीर-गुलाल चढ़ाते हैं और कीर्तन करते हैं. ओडिशा-बंगाल में यह दोल पूर्णिमा कहलाता है.

राधा-कृष्ण के फाग: ब्रज में होली राधा-कृष्ण की लीला का उत्सव है. फाग गाते हैं और भक्ति में डूबते हैं. मथुरा, वृंदावन, बरसाना में यह बहुत खास है.

किसानों का त्योहार: होली नई फसल का जश्न है. किसान गेहूं की बालियां और नई उपज होली में चढ़ाते थे. पूरा गांव मिलकर खुशी मनाता था.

रिश्ते सुधारने का पर्व: होली में पुरानी मनमुटाव भूल जाते हैं. लोग गले मिलते हैं और दोस्ती निभाते हैं. विदेशी अध्ययनकर्ताओं ने भी इसे रिश्तों को मजबूत करने वाला त्योहार बताया है.

होली की 3 प्रमुख कहानियां

  • होलिका दहन की मुख्य कहानी भक्‍त प्रहलाद और उसकी बुआ होलिका राक्षसी की है. होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर उसे जलाने के लिए आग में बैठी थी, लेकिन भगवान विष्णु ने प्रहलाद को बचा लिया और होलिका जल गई.
  • दूसरी कहानी सतयुग में पैदा हुई ढोंढा राक्षसी की है, जिसमें फाल्‍गुन के महीने में बच्‍चों के खेल में उसे मारा जा सका था.
  • तीसरी कहानी में भगवान शिव ने कामदेव को भस्म किया था. ये कहानियां अच्छाई की जीत दिखाती हैं.

यह भी पढ़िए: क्या ग्रहण के साये में जलेगी होलिका? जानें 3 मार्च का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त और नियम

Bharat Express Desk

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