आस्था

न आंखें खोलेंगे, न रास्ता देखेंगे…!180 KM की अनोखी कांवड़ यात्रा, वजह जान रह जाएंगे हैरान

Muzaffarnagar Viral Kanwar Yatra: सावन माह में चारों तरफ बम-बम भोले के जयकारे गूंज रहे हैं, लेकिन इस बार कांवड़ यात्रा में आस्था के साथ-साथ एक बेहद अनोखा और दिल छू लेने वाला सामाजिक संदेश भी देखने को मिल रहा है. दरअसल उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से गुज़र रही कांवड़ियों की टोली में एक ऐसे शिवभक्त ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, जो आंखों पर काली पट्टी बांधकर यह कठिन यात्रा पूरी कर रहे हैं.

इतना ही नहीं उनके साथ एक गाय भी इस यात्रा में कदम से कदम मिलाकर चल रही है, जो राहगीरों और अन्य श्रद्धालुओं के लिए कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. आईए जानते हैं क्या है पूरा मामल और क्या है इस अनोखी कांवड़ यात्रा का संदेश….

बिना देखे 180 किमी की यात्रा (Muzaffarnagar Viral Kanwar Yatra)

आंखों पर पट्टी बांधकर कांवड़ ला रहे इस अनोखे शिवभक्त का नाम सुनील भोला है. सुनील उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी से गंगाजल उठाकर अपनी टोली के साथ बागपत जिले के अपने गांव शाहपुर बड़ौली के लिए रवाना हुए हैं. हरिद्वार से उनके गांव की दूरी करीब 180 किलोमीटर है. इस लंबे और थका देने वाले सफर को सुनील बिना देखे, केवल भोलेनाथ के भरोसे और अपनी टोली के सहारे तय कर रहे हैं.

साथ में पैदल चल रही है गौ माता

इस कांवड़ यात्रा की सबसे खास बात यह है कि सुनील की इस टोली के साथ एक गाय भी पूरे रास्ते पैदल यात्रा कर रही है. पिट्टू बैग टांगे और हाथों में कांवड़ लिए सुनील के साथ चलती यह गाय जहां से भी गुजरती है, लोग हाथ जोड़कर उसे नमन करने लगते हैं. राहगीर इस अद्भुत दृश्य को देखकर दंग हैं कि कैसे भीड़-भाड़ और गाड़ियों के शोर के बीच भी गाय बिना किसी परेशानी के कांवड़ियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है.

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‘आंखों पर पट्टी’ बांधने के पीछे कारण क्या?

जब सुनील से पूछा गया कि आखिर उन्होंने आंखों पर पट्टी क्यों बांधी है, तो उनका जवाब समाज को झकझोर देने वाला था. सुनील का कहना है कि आंखों पर पट्टी बांधने का मकसद समाज को यह आईना दिखाना है कि आज सनातन धर्म के लोग गौ माता पर हो रहे अत्याचारों को देखकर भी अंधे बने हुए हैं. सबकी आंखों पर जैसे पट्टी बंधी है, किसी को दिखता ही नहीं कि हमारी गायों के साथ कितना अत्याचार हो रहा है.”

-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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