PM Modi Sukhbir Badal Meeting
PM Modi Sukhbir Badal Meeting: साल 2027 में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं. इससे पहले ही सूबे की राजनीति में खिचड़ी पकनी शुरू हो गई है. आज शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने पहुंचे. यह मुलाकात संसद भवन परिसर में ही हुई. इस बैठक में किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसको लेकर दोनों पक्षों ने कोई बयान जारी नहीं की गई है. लेकिन कयास लगने शुरू हो गए हैं कि अगले विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से बीजेपी और अकाली दल मिलकर चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. वहीं पीएम मोदी और सुखबीर सिंह बादल के इस मुलाकात पर अरविंद केजरीवाल ने गजब टिप्पणी की. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि क्या दोनों दल एक साथ आ रहे हैं?
बता दें कि दोनों दल लंबे समय से गठबंधन में चुनाव लड़ते रहे, लेकिन साल 2020 में किसान आंदोलन के समय दोनों दलों के बीच अलगाव हो गया था. अब एक बार फिर दोनों दल एक साथ आ सकते हैं. ऐसा इसलिए भी हो रहा है कि अलगाव के बाद भी अकाली दल को पंजाब में वो समर्थन नहीं मिला, जिसे सोचकर बादल परिवार ने बीजेपी से अपना दामन छुड़ाया था. वहीं बीजेपी भी पंजाब में अबतक वो पैठ नहीं बना पाई है, जिसकी उसे उम्मीद थी.
Delhi: Shiromani Akali Dal President Sukhbir Singh Badal left after meeting Prime Minister Narendra Modi pic.twitter.com/NHtDA1VRoA
— IANS (@ians_india) August 7, 2026
इन मुद्दों पर दोनों के बीच हुई बातचीत
सूत्रों के मुताबिक सुखबीर सिंह बादल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच पंजाब की बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर बातें हुईं. उन्होंने पीएम के सामने पंजाब में बढ़ते भ्रष्टाचार के मामले को भी उठाया. इसके बाद चर्चा शुरू हो गई कि क्या दोनों दल एक बार फिर साथ आने वाले हैं.
हालांकि पंजाब के कई बीजेपी नेता पिछले कई महीनों से यह लगातार दावा कर रहे हैं कि वो अकेले ही साल 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. इसी बीच पीएम मोदी और सुखबीर बादल के बीच मुलाकात ने दोनों दलों के गठबंधन के कयास तेज कर दिये हैं.
ढाई दशकों तक बनी रही दोस्ती
अकाली दल की गिनती भाजपा के सबसे पुराने साथियों में होती है. दोनों के बीच करीब ढाई दशकों तक दोस्ती बनी रही, लेकिन साल 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर दोनों की राहें अलग हो गईं.
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इसके बाद केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद दोनों दल अकेले ही सूबे की राजनीति में उतरे, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला. ऐसे में अब दोनों फिर से एक साथ आ सकते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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