श्रीकृष्ण ने 11 वर्ष की उम्र तक श्रीराधा, गोप-गोपियों संग ब्रजभूमि में लीलाएं कीं. 125 सौर-वर्षों के बाद अपने परम धाम लौटे.
सनातन धर्म में भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल लीलाओं का अद्भुत संगम ही नहीं, बल्कि वैदिक परंपरा के गूढ़ गणितीय और आध्यात्मिक संकेतों से भी परिपूर्ण है. इसमें सबको अचंभित करने वाला महत्वपूर्ण संबंध है नंबर ‘8’ का. भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अवतरित होने वाले श्रीकृष्ण का पूरा जीवन 8 के अंक से जुड़ा था.
आइए, यहां श्रीमद्भागवत पुराण, गर्ग संहिता और विष्णु पुराण जैसे प्रामाणिक ग्रंथों के आधार पर 5253वें श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर समझते हैं कि कान्हा का इस ‘आठ’ के अंक से क्या अलौकिक संबंध है-
भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ. इसके साथ ही, वे अपने माता-पिता (वसुदेव और देवकी) की आठवीं संतान के रूप में प्रकट हुए.
श्रीमद्भागवत पुराण के दसवें स्कंध में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि जब देवराज इंद्र तक को पराजित कर देने वाले अत्याचारी राक्षसराज कंस ने अपनी बहन देवकी की छह संतानों की एक के बाद एक हत्या कर डाली थी और सातवें गर्भ के रूप में शेषनाग (बलराम जी) का संकर्षण हुआ, तब स्वयं परब्रह्म ने आठवें संतान (श्रीकृष्ण) के रूप में अवतार लिया:
अथ सर्वगुणोपेतः कालः परमशोभनः।
यर्ह्येवाजनजन्मर्क्षं शान्तर्क्षग्रहतारकम्॥
देवक्यां देवरूपिण्यां विष्णुः सर्वगुहाशयः।
आविरासीद्यथा प्राच्यां दिशीन्दुरिव पुष्कलः॥
(श्रीमद्भागवतम् १०.३.१, १०.३.८)
अर्थ: जब संपूर्ण शुभ गुणों से युक्त परम सुंदर समय आया, रोहिणी नक्षत्र था और समस्त ग्रह-नक्षत्र शांत थे; तब देव रूपिणी देवकी जी के गर्भ से सर्वव्यापी भगवान विष्णु उसी प्रकार प्रकट हुए, जैसे पूर्ण चंद्रमा का उदय होता है.
अष्टपट्ट महिषी (8 मुख्य रानियाँ): द्वारकाधीश के रूप में प्रभु की आठ प्रमुख रानियाँ थीं, जिन्हें ‘अष्टपट्टमहिषी’ कहा जाता है- रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, सत्या (नाग्नजिती), भद्रा और लक्ष्मणा.
अष्टक संकीर्तन और अष्टयाम सेवा: पुष्टिमार्ग और गौड़ीय वैष्णव परंपरा में श्रीकृष्ण की दैनिक सेवा को ‘अष्टयाम’ (दिन के आठ पहर की सेवा) में बाँटा गया है. इसके अलावा, वल्लभाचार्य जी द्वारा रचित ‘मधुराष्टकम्’ (जिसमें 8 छंद हैं) प्रभु के रूप और लीला की मधुरता का वर्णन करता है.
अष्टछाप कवि: ब्रज साहित्य में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का गुणगान करने वाले 8 महान भगवद्-भक्त कवियों का समूह ‘अष्टछाप’ कहलाया (कुंभनदास, सूरदास, परमानंददास, कृष्णदास, गोविंदस्वामी, छीतस्वामी, चतुर्भुजदास और नंददास).
श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अपनी भौतिक शक्ति का वर्णन करते हुए उसे आठ भागों में विभाजित बताते हैं:
भूमिरापोऽनलो वायुः खं मनो बुद्धिरेव च।
अहङ्कार इतीयं मे भिन्ना प्रकृतिरष्टधा॥
(श्रीमद्भगवद्गीता ७.४)
अर्थ: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार – यह आठ प्रकार से विभक्त मेरी अपरा (भौतिक) प्रकृति है.
परमेश्वर श्रीकृष्ण इस अष्टधा प्रकृति (आठ तत्वों) के स्वामी हैं और जब वे अवतार लेते हैं, तो इसी 8 की संख्या के माध्यम से सृष्टि को अपने पूर्णत्व का संदेश देते हैं.
स्थायित्व और न्याय का अंक: अंकशास्त्र (Numerology) में ‘8’ का अंक शनिदेव का प्रतिनिधित्व करता है, जो न्याय, कर्मफल और अनुशासन का प्रतीक है. श्रीकृष्ण का पूरा जीवन अधर्मियों को उनके कर्मों का दंड देने (कर्मफलदाता) और धर्म की न्यायपूर्ण स्थापना करने में बीता.
अनंतता का प्रतीक (Infinity Symbol): आधुनिक गणित में अनंत (Infinity) का चिह्न ∞ होता है, जो वास्तव में आड़े रूप में लिखा गया ‘8’ ही है. श्रीकृष्ण स्वयं अनादि और अनंत (पूर्ण ब्रह्म) हैं.
आठ सिद्धियाँ: योग शास्त्र में वर्णित अष्ट सिद्धियों (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व) के श्रीकृष्ण सर्वकालिक स्वामी हैं.
BharatExpress.Com पर भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े ये आलेख भी पढ़ सकते हैं:
5253वाँ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: आज ही के दिन द्वापर युग में परमेश्वर ने लिया था मानव अवतार, पृथ्वी पर 125 वर्ष बिताए
पारंपरिक फसलों से हटकर किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए बिहार सरकार ने बांस ('ग्रीन…
Chicago Hindu Temple Attack Plot: अमेरिका के इलिनोइस में एक 19 वर्षीय युवक को हिंदू…
Genetic Engineering Course: साइंस के स्टूडेंट्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. IISc बैंगलोर ने 'एडवांसेस…
Pm modi: नवरात्रि के पांचवें दिन पीएम नरेंद्र मोदी ने मां स्कंदमाता को नमन करते…
Maharashtra Earthquake: महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में 15 अक्टूबर 2026 की सुबह 2.9 तीव्रता का…
बिग बॉस 20 से बाहर आते ही सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर नकुल ढुल (मीठू डॉन) ने…