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चाणूर और मुष्टिक कौन थे? जिन्होंने श्रीकृष्ण और बलराम पर किया हमला – लेकिन मिनटों में जान से हाथ धोना पड़ा

Krishna Janmashtami 2025: लगभग 5 हजार वर्ष पूर्व श्रीकृष्ण और बलराम ने चाणूर-मुष्टिक जैसे राक्षसों को अखाड़े में पराजित कर राक्षसराज कंस का वध किया और मथुरा नगरी को अत्याचार से मुक्त किया.

The Fall of Kansa: द्वापर युग की बात है. मथुरा नगरी में कंस (Demon Kansa) नामक राक्षस राजा था. उसके अत्‍याचारों से प्रजा तंग आ चुकी थी, यहां तक कि देवता-गंधर्व, यक्ष और अन्‍य ग्रहों (लोकों) पर निवास करने वाले प्राणियों में भी कंस ने कोहराम मचा रखा था. बहुत वर्षों बाद कंस की बहन देवकी की शादी के समय एक प्रचंड आकाशवाणी हुई.

आकाशवाणी में कंस ने सुना कि – उसकी बहन देवकी का आठवां पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा. इसी डर के कारण कंस ने देवकी और उसके पति राजा वसुदेव को कारागार में डाल दिया. एक साल के अंतर पर कंस कारागार में बंद अपनी बहन देवकी और जीजा वसुदेव के पास जाता था और उनसे नवजात संतान को छीनकर क्रूरता से हत्या कर देता था. इसी तरह कंस ने उनके छह पुत्रों की हत्‍या कर दी. मगर, सातवें और आठवें पुत्र – बलराम और श्रीकृष्ण – बच गए, क्‍योंकि वे स्‍वयं परमेश्‍वर थे.

जब सच साबित हुई आकाशवाणी

बलराम और श्रीकृष्ण मथुरा से कुछ कोस दूर ही यमुनापार गोकुल गांव में पले-बढ़े. कई सालों तक उन्‍हें नंदबाबा और मां यशोदा ने पाला-पोषा. जब श्रीकृष्ण और बलराम 11-12 साल के हुए, तो कंस को उनके बारे में पता चला. कंस ने उन्‍हें बहाने से मथुरा बुलवाया. कंस की साजिश थी कि वह बलराम और श्रीकृष्ण को अपने दो बलवान राक्षसों – चाणूर और मुष्टिक – जो कि पहलवानी करते थे, उनके हाथों से मरवा देगा.

बाल्यावस्था में श्रीकृष्ण
बाल्यावस्था में श्रीकृष्ण

गोकुल से मथुरा नगरी में आगमन

गोकुल से मथुरा पहुंचे श्रीकृष्ण और बलराम का नगरवासियों ने स्वागत किया. चारों ओर आनंद का वातावरण था, लेकिन कंस के महल में बड़ी साजिश रची जा रही थी. उसने अखाड़ा सजवाया, लोगों को बुलवाया, और चाणूर-मुष्टिक को आदेश दिया कि – “इन दो ग्वाल बालकों को कुचल डालो! यही तुम्हारी कीर्ति का समय है!”

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अखाड़े में ऐसे हुआ महामुकाबला

जब श्रीकृष्ण और बलराम अखाड़े में उतरे, तो चारों ओर सन्नाटा छा गया. लोग देखते रह गए – उनको लगा कि ये तो साधारण से किशोर हैं! उसी समय चाणूर और मुष्टिक गर्जना करते हुए रंगशाला में आगे बढ़े. चाणूर बोला, “हे कृष्ण! हम तुम्हें अपने साथ कुश्‍ती के योग्य मानते हैं. आओ, बल आज़माओ.”

श्रीकृष्ण मुस्कराए, “हम ग्वाले हैं, गाय चराते हैं, लेकिन यदि तुम्हें अपने बल का घमंड है, तो देख लो.”

मल्लयुद्ध में मारे गए दोनों महादैत्‍य

रंगशाला में कुश्‍ती आरंभ हुई. चाणूर ने श्रीकृष्ण पर प्रहार किया, उसकी विशाल भुजाएं जैसे पर्वत को झकझोर दें. किंतु उसके प्रहार श्रीकृष्ण पर ऐसे लग रहे थे, जैसे हाथी के शरीर पर फूल फेंककर मारे जा रहे हों. नपे-तुले वारों से बचते हुए, श्रीकृष्ण ने फुर्ती से चाणूर की बाँह पकड़ी और जोर से मरोड़ दिया. चाणूर वमन करता हुआ यमलोक सिधार गया. उधर, बलराम ने मुष्टिक को ललकारा. मुष्टिक ने आक्रमण किया, लेकिन बलराम ने उसे हवा में उठाया और भूमि पर पटक दिया. उसके बाद उसकी छाती पर प्रहार किया, जिससे मुष्टिक ने भी प्राण त्याग दिए.

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मथुरावासियों ने ली चैन की सांस

इन दोनों बलशाली राक्षसों के मरते ही मथुरावासियों में खुशी की लहर दौड़ गई. वहीं, राक्षसराज कंस की सभा में चीत्‍कार मच गया. कंस ने सैनिकों को आदेश दिया — “इन दोनों को बंदी बना लो!” मगर, कोई भी श्रीकृष्ण और बलराम को पकड़ न सका. दोनों भाइयों ने वहां अनेक हमलावरों को मार डाला.

आखिरकार कंस भी मारा गया

अंतत: कंस ने खुद श्रीकृष्ण पर हमला कर दिया. उसकी माया पर पार पाते हुए श्रीकृष्ण ने मल्लयुद्ध में कंस को सबके सामने मार गिराया. मथुरा नगरी बरसों बाद एक क्रूर-अत्‍याचारी, अधर्मी शासक से मुक्त हो गई. उसके बाद श्रीकृष्ण ने अपने नाना उग्रसेन को पुनः मथुरा का राजा बनाया.

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