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shri Krishna

5 हजार साल पहले कौरव-पांडवों को अस्त्र-शस्त्रों की शिक्षा देने वाले महान आचार्य द्रोण के पुत्र अश्वत्थामा को महाभारत के उस योद्धा के रूप में याद किया जाता है, जिसे परमेश्वर श्रीकृष्ण ने हजारों साल तक माथे के कोढ़ से परेशान पृथ्वी पर अकेले भटकने का श्राप दिया था.

भगवान श्रीकृष्ण से '8' के अंक का खास ताल्लुक रहा. पृथ्वी पर अष्टमी तिथि को मानव देह धारण करना, देवकी की 8वीं संतान बनना, बचपन में 8 सखियों संग खेलना, राजकुमार के रूप 8 पटरानियां होना और अष्टधा प्रकृति से संसार को संभालना - वे मनुष्यों में परमेश्वर के पूर्णअवतार माने गए.

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सिर्फ भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि उनके जीवन, लीलाओं और दिए गए संदेशों को याद करने का अवसर है.

SHRI KRISHNA JANMASHTAMI 2026: दुनिया भर में रह रहे 1.2 अरब से अधिक सनातन धर्मावलंबियों के आराध्य भगवान श्रीकृष्ण का आज 5253वाँ जन्मोत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. जानिए बाल गोपाल के जन्मोत्सव पर उनकी सही पूजन विधि, प्रिय भोग, निशीथ काल मुहूर्त और विशेष मंत्र.

आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है. हिंदू पंचांग और वैदिक गणना के अनुसार, इस साल यह पावन त्योहार 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है. आइए समझिए, उनके अवतार का परम उद्देश्य: क्यों धरा पर पधारे स्वयं परमेश्वर?

Krishna Janmashtami 2026 से पहले मथुरा-वृंदावन दुल्हन की तरह सज गया है. 25 चौराहे रोशनी से जगमगा रहे हैं और 4 सितंबर की मध्यरात्रि जन्मोत्सव मनाया जाएगा.

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026 के अवसर पर जानिए चित्तौड़गढ़ के सांवलिया जी मंदिर का इतिहास, जो एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया है और जहां सूर्य की किरणें अनोखा चमत्कार दिखाती हैं.

जन्माष्टमी पर जानिए बिहार के नवादा में स्थित ककोलत जलप्रपात के बारे में, जहां श्रीकृष्ण स्नान करते थे. 160 फीट ऊंचा यह प्राकृतिक झरना अपनी ठंडक और धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है.

भगवान श्रीकृष्ण व देवाधिदेव महादेव के बीच प्रगाढ़ प्रेम को दर्शाते देश-विदेश में कई देवालय हैं. इन मंदिरों में भक्ति के साथ शक्ति के अद्भुत मिलन के साथ ही भक्ति का बेहद सरल स्वरूप भी देखने को मिलता है. ऐसा ही ही दिव्य मंदिर उत्तर प्रदेश के श्रीकृष्ण नगरी मथुरा में है.

KRISHNA JANMASHTAMI 2026 DATE & MUHURAT: इस बार भगवान श्रीकृष्ण का 5253वाँ जन्मोत्सव मनेगा. तिथि की गणना को लेकर 4 और 5 सितंबर के बीच बने भ्रम को दूर करते हुए जानिए स्मार्त और वैष्णव संप्रदाय के अनुसार सही तारीख, निशीथ काल पूजा मुहूर्त और व्रत पारण का शास्त्रसम्मत नियम.

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