आस्था

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी गई, अब राधाष्टमी मनाने को आतुर करोड़ों सनातनी, क्या आपने किए इनके प्राकट्य स्थल के दर्शन?

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मथुरा के कारागार में योगेश्वर श्रीकृष्ण के अवतरण के ठीक 15 दिन बाद, भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को ब्रजभूमि अपनी अधिष्ठात्री देवी के प्राकट्योत्सव के आनंद-सागर में डूब जाती है. वर्ष 2026 में श्रीराधाष्टमी का यह महापर्व 19 सितंबर 2026 को भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा.

अधिकांश श्रद्धालु श्रीजी की लीलास्थली और ‘लाडली जी’ के महल के कारण बरसाना को ही उनका प्राकट्य स्थल मान लेते हैं. परंतु सनातन धर्मग्रंथ, महापुराण और ब्रज-संस्कृति का इतिहास गवाही देता है कि राधारानी का मूल प्राकट्य स्थल बरसाना नहीं, बल्कि यमुना तट पर स्थित पावन ग्राम रावल (Rawal) है.

1. अयोनिजा: यमुना के कमल-पुष्प पर अवतरित हुईं ‘ह्लादिनी शक्ति’

श्रीराधा कोई साधारण भौतिक जीवात्मा नहीं हैं, बल्कि वे परब्रह्म श्रीकृष्ण की नित्य स्वरूपा एवं उनकी आह्लादिनी शक्ति मानी गई हैं. जिस प्रकार माता सीता भूमि से अयोनिजा रूप में प्रकट हुई थीं, ठीक उसी प्रकार श्रीराधा भी माता के गर्भ (योनि) से नहीं जन्मीं. वे अयोनिजा हैं.

पद्म पुराण (पाताल खण्ड) एवं ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, द्वापर युग में गोपराज वृषभानु यमुना स्नान हेतु गए थे. वहाँ मध्याह्न काल में उन्होंने यमुना के जल में सहस्त्र दल स्वर्ण कमल पर सूर्य के समान एक अलौकिक दिव्य तेज देखा. उस दिव्य कमल-कोश के मध्य एक परम रूपवती, तेजोमयी नवजात बालिका मंद-मंद मुस्कुरा रही थी.

ततो दृष्ट्वा मया देवी बालभावेन संस्थिता।

पद्ममध्ये स्थितां तन्वीं बालसूर्यसमप्रभाम्॥

(पद्म पुराण)

अर्थात: वृषभानु जी ने देखा कि कमल-पुष्प के मध्य बाल-सूर्य के समान दीप्तिमान एक सुकोमल बालिका विराजमान है.

वृषभानु जी और उनकी धर्मपत्नी माता कीर्ति (जिन्हें कलावती भी कहा जाता है) की कोई संतान नहीं थी. वे अत्यंत वात्सल्य भाव से उस ईश्वरीय कन्या को अपने अंक (गोद) में उठाकर अपने महल (रावल ग्राम) ले आए.

श्रीराधा का रावल स्थित मंदिर, मान्यता है कि यहीं वे प्रकट हुई थीं

2. रावल ग्राम: प्राकट्य स्थल और ननिहाल का ऐतिहासिक साक्ष्य

मथुरा जनपद में गोकुल से लगभग 4-5 किलोमीटर की दूरी पर यमुना के पूर्वी तट पर बसा है रावल ग्राम.

ननिहाल एवं मूल निवास: माता कीर्ति का पीहर (मायका) रावल में था और वृषभानु जी का मूल निवास भी प्रारंभ में यहीं था. जब कंस के अत्याचार और उत्पात बढ़ने लगे, तब नन्दबाबा गोकुल से नन्दगांव (नंदीश्वर पर्वत) चले गए और वृषभानु जी भी अपने परिवार व गोधन सहित रावल से बरसाना (भानु-शिखर) जाकर बस गए.

अष्टछाप कवियों का प्रमाण: महाकवि छीतस्वामी ने अपनी पद-रचना में स्पष्ट गाया है:

‘राधा रावल प्रगट भई, आनंद उमंग्यो ब्रजधाम…’

प्राचीन साक्ष्य: रावल में आज भी वह ऐतिहासिक गर्भ-गृह स्थित है, जहाँ कई सौ वर्ष पुराना दुर्लभ करील का वृक्ष विद्यमान है और युगल-सरकार की स्वयंभू विग्रह प्रतिमा विराजित है.

3. श्रीकृष्ण से आयु में बड़ी थीं राधा, उनको देखकर ही नेत्र खोले

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीराधा का प्राकट्य भगवान श्रीकृष्ण के अवतार से साढ़े ग्यारह महीने (लगभग 1 वर्ष) पूर्व हुआ था. कहा जाता है कि रावल में प्राकट्य के बाद श्रीराधा ने संसार में किसी को भी देखने के लिए अपने नेत्र नहीं खोले. माता-पिता अत्यंत चिंतित थे कि बालिका जन्मांध है. परंतु यह राधा जी का संकल्प था कि वे अपने नेत्रों से इस नश्वर संसार में सबसे पहले केवल अपने प्राणवल्लभ परब्रह्म श्रीकृष्ण का ही दर्शन करेंगी.

प्रथम मिलन (गोकुल नंदोत्सव): मथुरा में जब कान्हा पैदा होते ही राक्षस-कंस के कारागार से गोकुल में नन्दबाबा के घर पहुंचा दिए गए थे तो वहां भव्य ‘नंदोत्सव’ मनाया गया था, तब श्रीराधा के पिता वृषभानु जी और माता कीर्ति अपनी एक वर्ष की कन्या को लेकर गोकुल बधाई देने पहुँचे थे.

पालने में झूलते हुए बालकृष्ण के पास जैसे ही नन्ही राधा को लाया गया, दोनों दिव्य सत्ताओं का मिलन हुआ. श्रीकृष्ण के पास लाते ही राधा जी ने पहली बार अपनी आँखें खोलीं और सीधे अपने आराध्य घनश्याम के दर्शन किए.

4. गोलोक से भूलोक: ‘श्रीदामा का शाप’ बना अवतार की वजह

सच्चिदानंदमयी राधा जी को मनुष्य रूप में पृथ्वी पर क्यों अवतरित होना पड़ा? ब्रह्मवैवर्त पुराण (प्रकृति खण्ड एवं श्रीकृष्णजन्म खण्ड) में इसका विस्तृत आख्यान मिलता है.

गोलोक धाम में एक बार श्रीकृष्ण की विरजा नामक सखी के साथ लीला को देखकर राधा जी कुपित हो गईं. उस समय भगवान के अनन्य पार्षद श्रीदामा ने राधा जी को शांत करने का प्रयास करते हुए कुछ तर्क दिए, जिससे रुष्ट होकर राधा जी ने श्रीदामा को असुर योनि में जाने का शाप दिया (जो बाद में शंखचूड़ असुर बना).

प्रत्युत्तर में श्रीदामा ने भी राधा जी से कहा:

गोलोकाद् भ्रष्टरूपा च मानवी त्वं भविष्यसि।

शतवर्षं च कालेन हरिणा सह विप्रयोगभाक्॥

(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्णजन्मखण्ड)

अर्थात: “हे देवि! आप गोलोक से भूतल पर जाकर मानवी रूप में जन्म लेंगी और पृथ्वी पर आपको 100 वर्षों तक अपने प्रियतम श्रीहरि से विरह का ताप सहना पड़ेगा.”

यद्यपि यह शाप प्रतीत होता है, किंतु स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने राधा जी को आश्वस्त किया कि यह कोई शाप नहीं, अपितु पृथ्वी पर अधर्म के नाश, भक्तों के उद्धार और ब्रज में ‘दिव्य प्रेमरस (महारास)’ के विस्तार की पूर्व-नियोजित ईश्वरीय योजना थी.

5. श्रीराधा-कृष्ण का अद्वैत तत्त्व: एक ही परमतत्त्व के दो रूप

शास्त्रों में श्रीकृष्ण और श्रीराधा दो नहीं, बल्कि एक ही परमतत्त्व के दो रूप हैं:

राधा पूर्णाह्लादिनी स्यात् कृष्णश्च पूर्णशक्तिमान्।

द्वयोर्न भेदः संसिद्धो वह्निदाहकयोरिव॥

(गर्ग संहिता)

अर्थात: जिस प्रकार अग्नि और उसकी दाहकता (जलाने की शक्ति) को अलग नहीं किया जा सकता, उसी प्रकार राधा और कृष्ण अभिन्न हैं.

यही कारण है कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं गर्ग संहिता और ब्रह्मवैवर्त पुराण में स्वीकार करते हैं कि राधा के बिना वे अपूर्ण हैं.

फोटो: बरसाना में (भानु-शिखर) स्थित राधा रानी का महल

राधाष्टमी 2026: आप ब्रज आएं तो रावल को भी करिएगा नमन

राधाष्टमी के पावन अवसर पर जहाँ बरसाना के लाडली जी मंदिर में सवा मन लड्डू बरसेंगे और गगनभेदी जयकारे गूंजेंगे, वहीं हर कृष्ण-राधा अनुरागी को अपनी यात्रा में यमुना के उस पावन तीर ‘रावल’ को अवश्य नमन करना चाहिए, जहाँ सहस्त्रदल कमल पर ब्रज की अधिष्ठात्री, प्रेम की साक्षात प्रतिमूर्ति श्री वृषभानु-दुलारी ने पहली बार इस धरा को अपनी चरण-रज से धन्य किया था.

इस अवसर पर BharatExpress.Com के ये विशेष आलेख भी पढ़ सकते हैं:

आज देखिए बृजभूमि में हजारों साल पहले हुईं श्री राधा-कृष्ण की सचित्र बाल लीलाएं, ये अहसास करने दुनियाभर से आते हैं लोग

अष्‍टमी को देवकी की 8वीं संतान के रूप में प्राकट्य, 8 सखी, 8 ही पटरानियां…जानिए श्रीकृष्ण से ‘8’ अंक का क्‍या ताल्‍लुक रहा

5253वाँ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: परमेश्वर ने जब पृथ्वी पर लिया था मानव अवतार, 125 वर्ष बिताए — प्रस्थान करते ही शुरू हुआ कलयुग

1.2 अरब से ज्यादा सनातनियों के आराध्य भगवान श्रीकृष्ण का 5253वाँ जन्मोत्सव, जानें पूजन विधि, भोग सामग्री और सिद्ध मंत्र

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के लिए फिर बुलंद हुई आवाज, साधु-संतों ने कर डाली ‘कारसेवा’ की घोषणा; कब निपटेगा विवाद?

चले आइए श्री राधा-कृष्ण के ब्रज में होली खेलने… 24 फरवरी से 5 मार्च तक होलिकोत्‍सव का आनंद लेंगे लाखों लोग

शाम ढलते ही बंद हो जाता है यह वन: हर रात रास रचाने आते हैं 12-13 साल के कान्‍हा, तुलसी के पौधे बन जाते हैं गोपियां

‘यशोमति मैया से बोले नंदलाला…’ श्री कृष्ण पर बने हैं ढेरों गाने, लीला और भक्ति का दिखता है संगम

Vijay Ram

'भारत एक्सप्रेस' में चीफ सब एडिटर। न्‍यूज वेबसाइट पर एवरग्रीन स्‍टोरीज, क्रिएटिव/स्‍पेशल प्रजेंटेशन, हाइलाइट्स के अगुआ। संस्‍था के शुरुआती दौर से दिन-रात हर मौके पर दम-दिमाग झोंककर स्वयं को तपाया। अब तक 8,000 से ज्‍यादा पोस्ट्स पब्लिश कर चुके, 1K+ बाइलाइन हुईं। 'भारत एक्सप्रेस' के CMD एवं एडिटर-इन-चीफ उपेन्द्र राय जी के प्रोग्राम्स (कॉन्क्लेव), और आर्टिकल्‍स को Bharatexpress.com पर प्रमुखता से कवर करते हैं। जर्नलिज्‍म में इनके 10+ वर्ष बीते। यहां से पहले एबीपी इंटरनेशनल, वनइंडिया हिंदी, राजस्‍थान पत्रिका और भास्कर ग्रुप में सेवा दे चुके। देश-विदेश, सैन्य-रणनीति, स्पेस साइंस, ऑफबीट, धर्म-अध्यात्म की खबरों में रुचि।

Recent Posts

BIGG BOSS में छलका सलमान खान का दर्द, बताया कैसे एक कोर्ट केस से बिगड़ी पूरी छवि: देखें VIDEO

Salman Khan Controversy: सलमान खान ने बिग बॉस में खुलासा किया कि कोर्ट केस और…

36 minutes ago

शिष्य की मौत के 9 दिन बाद प्रेमानंद महाराज ने तोड़ी चुप्पी! कहीं ये बड़ी बात

Premanand Maharaj Ashram Case: शिष्य दीपक लोधी की मौत के 9 दिन बाद प्रेमानंद महाराज…

2 hours ago

नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित मच्छार को बताया दुनिया का हीरो, इजरायल के स्वतंत्रता दिवस के लिए दिया खास न्योता

Captain Smit Machchhar: नेतन्याहू ने भारतीय पायलट स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ कर उन्हें…

2 hours ago

सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर बड़ा हवाई हमला: हूतियों ने दागे बैलिस्टिक मिसाइल, आसमान में उठा धुएं का गुबार

Saudi Riyadh Missile Attack: सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अरामको की सुविधा को बैलिस्टिक…

2 hours ago

आज का पंचांग: नवमी तिथि में कौन सा समय शुभ? जानें राहुकाल, चौघड़िया और मुहूर्त

Aaj Ka Panchang: जानें आश्विन कृष्ण नवमी तिथि, पुनर्वसु नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल,…

3 hours ago