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Radha Ashtami

राधाष्टमी पर राधारानी के प्राकट्य समय को लेकर श्रद्धालुओं में खास जिज्ञासा रहती है. वैष्णव परंपरा में उनका प्राकट्य मध्याह्न काल में माना जाता है.

Radha Ashtami Special Story: जानिए गोलोक धाम में श्रीदामा के उस एक श्राप की कहानी, जिसके कारण देवी राधा को पृथ्वी पर मानव रूप में जन्म लेना पड़ा और सहना पड़ा श्रीकृष्ण से 100 वर्षों का विरह. ब्रह्मवैवर्त पुराण से श्लोकों सहित पढ़िए पूरी कथा.

19 सितंबर 2026, शनिवार को भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के साथ राधाष्टमी का पर्व मनाया जाएगा. आयुष्मान और सौभाग्य योग का संयोग भी रहेगा.

Radha Ashtami : ब्रजभूमि सहित पूरी दुनिया के कृष्ण-राधा भक्तों के लिए आज महाउत्सव है. यदि आपकी भी आराध्या श्री राधा हैं तो आपकी सुविधा के लिए यहां 10 प्रमुख मंदिरों की सूची दी गई है, जहाँ आज राधा अष्टमी की धूम है.

Radha Ashtami 2026: राधा अष्टमी 2026 में 19 सितंबर, शनिवार को मनाई जाएगी. मध्याह्न पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक रहेगा. इस दिन राधा रानी की विधि-विधान से पूजा, अभिषेक और भोग लगाने की परंपरा है। जानें तिथि, पूजा विधि, व्रत कथा और धार्मिक महत्व.

Radha Ashtami 2026: ब्रजभूमि अपनी आराध्या, वृषभानु-दुलारी श्रीराधा के प्राकट्योत्सव के लिए पूरी तरह सज चुकी है. इस बार श्रीराधा का 5254वां प्राकट्योत्सव है. राधानगरी बरसाना में जनसैलाब उमड़ रहा है. जानिए कैसे कर सकते हैं दर्शन -

राधा अष्टमी 2026: इस बार श्रीराधा का 5254वां प्राकट्योत्सव मनेगा. BharatExpress.Com पर आज ही जान लीजिए श्रीराधा के प्राकट्य का रहस्य. 5254 बरस पहले यमुना किनारे रावल में कमल पुष्प पर प्रकट हुई थीं लाडली जी, पहली बार अपने नेत्र श्रीकृष्ण के आने पर खोले.