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जय कन्हैयालाल की: आज रात 11:57 से शुरू होगा पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त! जानें पूजन विधि, भोग सामग्री और सिद्ध मंत्र

SHRI KRISHNA JANMASHTAMI 2026: दुनिया भर में रह रहे 1.2 अरब से अधिक सनातन धर्मावलंबियों के आराध्य भगवान श्रीकृष्ण का आज 5253वाँ जन्मोत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. जानिए बाल गोपाल के जन्मोत्सव पर उनकी सही पूजन विधि, प्रिय भोग, निशीथ काल मुहूर्त और विशेष मंत्र.

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पृथ्वी पर रह रहे 1.2 अरब से अधिक हिंदू अनुयायियों के आराध्य, जगद्गुरु भगवान श्रीकृष्ण का 5253वाँ जन्मोत्सव (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी) पूरे उत्साह, भक्ति और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है. पौराणिक संदर्भों और वैदिक सौर गणना के अनुसार, अधर्म का नाश करने और धर्म की पुनर्स्थापना करने वाले योगेश्वर श्रीकृष्ण मानव रूप में 125 वर्ष और 8 माह से अधिक समय तक इस धरा पर रहे थे.

सनातन धर्म का यह अत्यंत पावन पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. पंचांगीय गणना के अनुसार, अष्टमी तिथि इस बार 4 सितंबर को देर रात 2:25 बजे से शुरू हो चुकी है, जो 5 सितंबर को दोपहर 12:13 बजे तक रहेगी. इस दौरान रोहिणी नक्षत्र का शुभ संयोग मध्यरात्रि में विद्यमान रहेगा.

निशीथ काल पूजा का शुभ मुहूर्त

जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए निशीथ काल में पूजा का विशेष महत्व है.

निशीथ पूजा मुहूर्त: आज (4 सितंबर) की रात 11:57 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर की देर रात 12:43 बजे तक (अवधि लगभग 46 मिनट) रहेगा. इसी दौरान श्रद्धालु बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाकर उनकी विशेष पूजा-अर्चना कर सकते हैं.

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: चरणबद्ध पूजन विधि

धर्मशास्त्रों में जन्माष्टमी के पूजन का विशेष विधान बताया गया है:

मन में संकल्प और तैयारी: सुबह स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और घर तथा पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें.

मूर्ति की स्थापना: पूजा की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.

अभिषेक: मध्यरात्रि में नंदलाल के जन्म के बाद उनका पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से अभिषेक करें.

श्रृंगार ऐसे करें: अभिषेक के बाद उन्हें पीले वस्त्र पहनाएं और मोरपंख, बांसुरी, मुकुट व ताजे फूलों से सुंदर श्रृंगार करें.

आरती, झूला: दीप, धूप, शंख की ध्वनि और घंटी के साथ आरती उतारें. इसके बाद लड्डू गोपाल को फूलों से सजे झूले में विराजमान कर झूला झुलाएं. इस दौरान श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक पढ़ें और भजन-कीर्तन करें.

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यशोदा नंदन के प्रिय भोग और छप्पन भोग

भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में उनके प्रिय सात्विक व्यंजनों का भोग लगाना अनिवार्य माना जाता है:

प्रिय भोग: यशोदा नंदन को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, मखाने की खीर, बादाम की पट्टी, रामदाना के लड्डू और पंचामृत अत्यंत प्रिय हैं.

तुलसी पत्र: भगवान के प्रत्येक भोग में तुलसी पत्र (तुलसी की पत्ती) अवश्य रखें, क्योंकि तुलसी पत्र के बिना कान्हा भोग स्वीकार नहीं करते.

छप्पन भोग: सामर्थ्य अनुसार भक्त आज के दिन लड्डू गोपाल को छप्पन भोग भी अर्पित करते हैं, जिनमें विभिन्न प्रकार की मिठाइयां, मेवे, फल और सात्विक व्यंजन शामिल होते हैं.

मनोकामना पूर्ति के लिए सिद्ध मंत्र

जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए इन दिव्य मंत्रों का जप करें:

‘ओम क्रीं कृष्णाय नमः’ — मानसिक शांति और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए.

‘हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे’ — परम भक्ति और मोक्ष प्राप्ति के लिए.

‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ — पारिवारिक समृद्धि, सुख-शांति और प्रभु कृपा के लिए.

‘क्लीं कृष्णाय नमः’ — जीवन में ऐश्वर्य और समृद्धि के लिए.
इसके साथ ही आज के दिन ‘श्री कृष्णम शरणम मम’ का निरंतर जाप और ‘श्रीकृष्णाष्टकम’ का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है.

Utensils in worship

व्रत, जन्मोत्सव और दान का महत्व

जन्माष्टमी के दिन भक्तों को उपवास (निर्जला या फलाहार) रखना चाहिए. रात में ठीक 12 बजे शंख बजाकर, घंटी बजाकर नंदलाल का जन्मोत्सव मनाएं और ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे लगाएं. अगले दिन व्रत का पारण करने के बाद अपनी सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों, निर्धनों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और फल का दान करें.

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