आस्था

सूर्यनारायण स्वामी मंदिर: यहां दोनों पत्नियों के साथ भगवान सूर्य देते हैं दर्शन, दांपत्य जीवन में खुशहाली का मिलता है आशीर्वाद

Aastha news: देश में भगवान सूर्य के कई मंदिहैं, जहां भक्त अपनी मनोकामना लेकर जाते हैं. सूर्य भगवान की पूजा करने से जीवन में उन्नति होती है और शत्रुओं का नाश होता है. कहा जाता है कि भगवान शिव से लड़ाई में भगवान सूर्य के 12 टुकड़े हो गए थे और जहां-जहां उनके टुकड़े गिरे, वहां भगवान सूर्य के मंदिरों का निर्माण कराया गया.

आंध्र प्रदेश में भी ऐसा मंदिर

आंध्र प्रदेश में भी ऐसा मंदिर है, जहां भगवान सूर्य अपनी दोनों पत्नियों के साथ विराजमान हैं. आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के पास पेद्दापुडी मंडल के गोलाला ममीदादा गांव में भगवान सूर्य का सूर्यनारायण स्वामी मंदिर स्थापित है. यह मंदिर थुल्या भागा (तुंगभद्रा) नदी के किनारे बना है. मंदिर 16 एकड़ में फैला है और इसका गोपुरम (प्रवेश द्वार का आकार) 170 फीट ऊंचा है, जिसे अलग-अलग नक्काशियों से सजाया गया है.

गोपुरम पर अलग-अलग देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को बारीकी से उकेरा गया है, जिसमें हिंदू धर्म के महाकाव्यों को दिखाने की कोशिश की गई है. इस कला को ‘चिन्ना भद्राचलम’ के नाम से जाना जाता है. गोपुरम को सजाने के लिए विभिन्न रंगों का इस्तेमाल किया गया है.

कब हुई थी स्थापना?

मंदिर की स्थापना साल 1920 में श्री कोव्वुरी बसिवि रेड्डी गारू नाम के समाजसेवी ने की थी. गारू के बारे में कहा जाता है कि गांव में उनके समान धार्मिक और दानी इंसान कोई नहीं था. उन्होंने न केवल मंदिर के लिए समर्पित सेवा प्रदान की है, बल्कि अपना जीवन भी बड़े पैमाने पर जनता के लाभ और कल्याण में बिता दिया. उन्होंने ही मंदिर का निर्माण कराया है और आज भी हिंदू शास्त्रों के अनुसार भगवान सूर्य की पूजा की जाती है.

मंदिर का प्रवेश द्वार से लेकर गर्भगृह तक दोनों ही देखने लायक हैं. प्रवेश द्वार पर सूर्य भगवान सात घोड़ों के साथ रथ को चला रहे हैं, जबकि मंदिर के गर्भगृह में भगवान सूर्य अपनी दोनों पत्नी ऊषा और छाया के साथ विराजमान हैं.

भगवान के नाम पर कसम लेने की प्रथा

मान्यता है कि मंदिर में आकर भक्त मनोकामना पूरी करने के लिए दोबारा मंदिर में आने का संकल्प लेते हैं. वहां भक्तों के बीच भगवान के नाम पर कसम लेने की प्रथा है और मनोकामना पूरी होने पर कसम या संकल्प को पूरा भी करते हैं.

गर्भगृह में विराजमान भगवान सूर्य और उनकी दोनों पत्नियों के दर्शन से सुख-संपत्ति और दांपत्य जीवन में खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है. भक्त दूर-दूर से भगवान सूर्य का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर में आते हैं. रविवार के दिन मंदिर में ज्यादा भीड़ होती है, क्योंकि रविवार को मंदिर में विशेष पूजा अनुष्ठान किए जाते हैं.

ये भी पढ़ें: Devuthani Ekadashi Kab Hai: शाम से पहले ही उठाएं देव वरना हो जाएगा अपशगुन, जानें 1 या 2 कब हैं देवउठनी एकादशी और तुलसी पूजन

-भारत एक्सप्रेस

Bharat Express Desk

Recent Posts

सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर भीषण हमला, 12 की मौत और 300 से ज्‍यादा घायल; 11 भारतीय भी चपेट में आए

Riyadh Airport Attack: सऊदी अरब के रियाद स्थित किंग खालिद एयरपोर्ट पर भीषण हमला हुआ.…

9 minutes ago

‘जेल में भी प्यार से देते हैं खाना…’ बिग बॉस में स्काउट पर भड़के सलमान खान

'बिग बॉस 20' के वीकेंड का वार में सलमान खान ने स्काउट ओपी को काजी…

24 minutes ago

काशी में लगेगी संस्कृति संसद: 3 हजार संत-विद्वान जुटेंगे, जेन-जी को मिलेगा अपनी बात रखने का मंच

Sanskriti Sansad 2026: काशी में 3 से 5 नवंबर तक आयोजित होने वाली संस्कृति संसद…

27 minutes ago

15 कॉलेजों ने दाखिला देने से नकारा, आज 19 की उम्र में खड़ा कर दिया करोड़ों का AI एंपायर! पढ़ें जैक की प्रेरक कहानी

Jack Yadegari AI Startup: 15 विश्वविद्यालयों से रिजेक्शन झेलने वाले 19 वर्षीय जैक यादेगारी ने…

52 minutes ago

राहुल गांधी ने किया सुप्रीम कोर्ट मार्च का आह्वान, CJI को सौंपा जाएगा ज्ञापन

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ऐलान किया है कि सोमवार को विपक्ष, युवा…

1 hour ago

पीएम मोदी ने चेन्नई में गिनाईं शिक्षा और खेल के क्षेत्र की उपलब्धियां, कहा- देश के विकास की धुरी हैं युवा

पीएम मोदी ने चेन्नई में जैगोपाल गरोडिया हिंदू विद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित…

2 hours ago